CGMSC घोटाला : “हमर लैब” योजना में 550 करोड़ के नुकसान का खुलासा, तीन कारोबारी गिरफ्तार


रायपुर।
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। “हमर लैब” योजना के तहत मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीदी में भारी अनियमितताओं और कार्टेलाइजेशन के आरोप में यह गिरफ्तारी की गई है। ब्यूरो में दर्ज अपराध क्रमांक 05/2025 के तहत 18 जनवरी 2026 को तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि., पंचकुला के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, श्री शारदा इंडस्ट्रीज रायपुर के प्रोप्राइटर राकेश जैन और रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. के लाईजनर प्रिंस जैन (शशांक चोपड़ा का जीजा) शामिल हैं।
ब्यूरो के अनुसार राज्य की जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला अस्पतालों, एफआरयू, सीएचसी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में “हमर लैब” योजना लागू की गई थी। इसके तहत मेडिकल उपकरण, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की खरीदी के लिए निविदा प्रक्रिया अपनाई गई। विवेचना में सामने आया कि पुल टेंडरिंग के माध्यम से मोक्षित कॉर्पोरेशन को निविदा दिलाने के लिए रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निविदा में भाग लिया और उसे सहयोग प्रदान किया।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से संबंधित फर्मों ने आपसी सांठगांठ और कार्टेलाइजेशन किया। टेंडर प्रक्रिया में केवल तीन ही फर्में शॉर्टलिस्ट हुईं और तीनों के वित्तीय प्रस्ताव खोले गए। तीनों पात्र फर्मों द्वारा टेंडर दस्तावेजों में उत्पादों, पैक-साइज, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स का विवरण एक समान पैटर्न में भरा गया। यहां तक कि जिन उत्पादों का नाम निविदा दस्तावेज में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं था, उन्हें भी तीनों फर्मों ने समान तरीके से दर्शाया। दरों के कोटेशन में भी एक जैसा पैटर्न देखने को मिला, जिसमें सबसे कम दर मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा, उसके बाद रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और फिर श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा कोट की गई।
इस साजिश के चलते मोक्षित कॉर्पोरेशन ने CGMSC को एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति की। इससे शासकीय राशि का दुरुपयोग हुआ और शासन को लगभग 550 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंची है।
गिरफ्तार तीनों आरोपियों को 19 जनवरी 2026 को माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
ब्यूरो ने बताया कि जनहित से जुड़ी “हमर लैब” योजना में शासकीय धन के दुरुपयोग से संबंधित सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका तय कर आगे भी सख्त विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

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