19वीं दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सोनकर कॉलेज मुंगेली में भव्य रूप से संपन्न


मुंगेली। सोनकर कॉलेज, मुंगेली में आयोजित 19वीं दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ 17 जनवरी 2026 को पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति माननीय प्रो. डॉ. व्ही. के. सरस्वत जी के मुख्य आतिथ्य में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक जी ने की।


विशेष अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्र भूषण वाजपेई जी, अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्री मदन मोहन अग्रवाल जी, सोनकर कॉलेज के संस्थापक एवं समाजसेवी श्री संतुलाल सोनकर जी तथा सोनकर कॉलेज के डायरेक्टर श्री शिव आशीष सोनकर जी मंचासीन रहे।
संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. गजेंद्र तिवारी ने जानकारी दी कि प्रातः 9:30 बजे से 11:00 बजे तक पंजीयन के पश्चात 11:00 से 12:30 बजे तक उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया, वहीं 12:30 से 2:00 बजे तक प्रथम तकनीकी सत्र का आयोजन हुआ। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता महाराष्ट्र के अमलनेर से पधारे सुविख्यात शिक्षाविद डॉ. सुरेश माहेश्वरी जी ने की। इस सत्र में डॉ. रामशंकर भारती (झांसी), डॉ. अनीता सिंह (बिलासपुर) एवं डॉ. विनोद कुमार वर्मा (बिलासपुर) की विशेष उपस्थिति रही।


उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. व्ही. के. सरस्वत जी ने कहा कि सोनकर कॉलेज छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह महाविद्यालय विश्वविद्यालय की ओर अग्रसर है, जहां विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें आसपास के जिलों एवं अन्य जिलों के विद्यार्थी भी अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए संस्थापक श्री संतुलाल सोनकर जी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है तो केवल उन्हें मंच प्रदान करने की, और यह कार्य सोनकर कॉलेज मुंगेली बखूबी कर रहा है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विनय कुमार पाठक जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “विकलांग विमर्श एक अध्ययन” विषय शोध एवं पीएचडी का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस महाविद्यालय से इस विषय पर अनेक शोधार्थी आगे आएंगे। साथ ही उन्होंने इस आयोजन को अब तक का सबसे बड़ा एवं प्रभावशाली आयोजन बताया।


संस्थापक श्री संतुलाल सोनकर जी ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय से महाविद्यालय और अब महाविद्यालय से विश्वविद्यालय की ओर बढ़ना उनके अथक प्रयासों का परिणाम है, जो आप सभी प्रबुद्धजनों के सहयोग से ही संभव हो पाया है।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. रामगोपाल सिंह (गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद) ने की। इस सत्र में डॉ. मीना सोनी (झारसुगुड़ा, उड़ीसा) एवं डॉ. पायल लिल्हारे (निवाड़ी, मध्यप्रदेश) ने अपने सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। सायंकालीन सत्र में सोनकर कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक संध्या ने सभी उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसे दर्शकों ने भूरी-भूरी प्रशंसा दी।


संगोष्ठी के द्वितीय दिवस तीसरे तकनीकी सत्र का आयोजन “विकलांग विमर्श” विषय पर किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. मीनकेतन प्रधान (रायगढ़) ने की। मंच पर डॉ. श्रीधर गौरहा (बिलासपुर), लिप्सा पटेल (सुंदरगढ़, उड़ीसा) एवं डॉ. स्मृति जैन उपस्थित रहीं। सभी वक्ताओं ने संस्था के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह संस्था दिन-दुगनी, रात-चौगुनी तरक्की करे।


इस अवसर पर केंद्रीय विद्यालय बिलासपुर की छात्रा कुमारी अमिय दुबे ने विकलांग चेतना विषय पर प्रस्तुत अपने आलेख से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
डॉ. गजेंद्र तिवारी ने बताया कि 17 एवं 18 जनवरी को आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में 50 से अधिक शोध आलेखों का शोध-सार वाचन किया गया। इसमें विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों, शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों के प्राध्यापकों, समाजसेवियों एवं इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की। इसी कार्यक्रम में डॉ. अनीता सिंह एवं अनुपमां दास जी की पुस्तक “विकलांग विमर्श की कहानी – भाग दो” का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री राजेंद्र अग्रवाल जी सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, प्राध्यापक, समाजसेवी एवं आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे। मुंगेली क्षेत्र का यह अब तक का सबसे बड़ा गौरवशाली राष्ट्रीय कार्यक्रम रहा, जिसमें राज्य सहित देश के विभिन्न प्रांतों से आए शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं प्राचार्यों ने सहभागिता की।


संगोष्ठी की सफलता में सोनकर कॉलेज के समस्त स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. गजेंद्र तिवारी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन संस्था के संस्थापक श्री संतुलाल सोनकर जी ने किया।

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