

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने अपने सभी अधिकारी-कर्मचारियों के लिए आवासीय परिसरों में रूफटॉप सोलर पावर प्लांट लगाना अनिवार्य कर दिया है। कंपनी के निर्देशानुसार जिन कर्मचारियों के आवास पर बिजली कनेक्शन नहीं है अथवा जो सोलर प्लांट स्थापित नहीं कर पाएंगे, उन्हें हाफ बिजली बिल योजना का लाभ नहीं मिलेगा। प्रदेशभर में ऐसे लगभग 9 हजार अधिकारी-कर्मचारी बताए जा रहे हैं।
बिजली अधिकारी-कर्मचारी संघ द्वारा कंपनी को अवगत कराया गया था कि बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी किराए के मकानों में रहते हैं, कई के नाम पर बिजली मीटर नहीं है और कुछ निजी आवासों की छत तकनीकी रूप से सोलर पैनल का भार सहने योग्य नहीं है। इन व्यावहारिक और तकनीकी समस्याओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने ऐसे कर्मचारियों को घोषणा पत्र भरकर कार्यालय में जमा करने के निर्देश दिए हैं। घोषणा पत्र के आधार पर सक्षम अधिकारी यह तय करेंगे कि संबंधित कर्मचारी को 50 प्रतिशत छूट दी जा सकती है या नहीं।
इन श्रेणियों को मिल सकेगी छूट
कंपनी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार निम्न श्रेणियों के कर्मचारियों को रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की अनिवार्यता से छूट दी जाएगी—
कंपनी आवास या फ्लैट में रहने वाले कर्मचारी, जिनके या उनके पति/पत्नी के नाम छत्तीसगढ़ में कोई निजी आवास नहीं है।
किराए के मकान में रहने वाले कर्मचारी, जिनके या उनके पति/पत्नी के नाम राज्य में कोई आवास नहीं है।
संयुक्त परिवार में रहने वाले कर्मचारी, जिनके या उनके पति/पत्नी के नाम विद्युत कनेक्शन नहीं है।
तकनीकी व संरचनात्मक बाधाओं वाले मामले, जहां निजी आवास की छत सोलर पैनल का भार सहन करने में सक्षम नहीं है या बहुमंजिला भवन व अपार्टमेंट में साझा छत होने के कारण सोलर प्लांट लगाना संभव नहीं है।
इन सभी मामलों में संबंधित कर्मचारियों को घोषणा पत्र भरकर अपने कार्यालय प्रमुख के पास जमा करना होगा। सभी आवेदनों की समीक्षा के बाद सक्षम अधिकारी यह निर्णय लेंगे कि उन्हें 50 प्रतिशत बिजली बिल छूट दी जाए या नहीं।
कंपनी का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य अधिकारी-कर्मचारियों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना, बिजली की बचत करना और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना है। वहीं, जिन कर्मचारियों के लिए तकनीकी या कानूनी कारणों से सोलर पैनल लगाना संभव नहीं है, उन्हें प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत राहत दी जा रही है।
इस संबंध में कार्यपालक निदेशक एके अम्बस्ट ने स्पष्ट किया कि सभी अधिकारी-कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से घोषणा पत्र जमा करना होगा, उसी के बाद 50 प्रतिशत छूट दिए जाने पर विचार किया जाएगा।
