बिलासपुर में कामवाली बाइयों की हड़ताल, 1500 घरों में ठप हुआ घरेलू कामकाज, महीने में 3 दिन छुट्टी, सैलरी बढ़ाने और आने-जाने के किराए की उठी मांग…!

शशि मिश्रा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सरकंडा थाना क्षेत्र के विजयापुरम इलाके में शनिवार सुबह घरेलू कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। इलाके की करीब 400 कामवाली बाइयों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोसायटी के बाहर धरना शुरू कर दिया, जिससे विजयापुरम कॉलोनी के लगभग 1500 घरों में रोजमर्रा के काम प्रभावित हुए। धरने के चलते कई घरों में सुबह की चाय तक नहीं बन पाई, वहीं नाश्ता और अन्य घरेलू काम भी ठप रहे। हड़ताल से सबसे अधिक परेशानी गृहणियों और कामकाजी महिलाओं को झेलनी पड़ी।

रास्ता बंद होने से बढ़ी परेशानी
विजयापुरम कॉलोनी के पीछे स्थित अटल आवास में रहने वाली अधिकांश महिलाएं इसी कॉलोनी में झाड़ू-पोछा, बर्तन और खाना बनाने का काम करती हैं। कामवाली बाइयों का कहना है कि वे पिछले 18 वर्षों से कॉलोनी के पीछे वाले रास्ते का उपयोग कर आती-जाती थीं, लेकिन सुरक्षा का हवाला देते हुए यह रास्ता हाल ही में बंद कर दिया गया है। रास्ता बंद होने के कारण अब उन्हें काम पर पहुंचने के लिए 4 से 5 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं।

क्या हैं कामवाली बाइयों की मांगें
धरना दे रहीं बाइयों ने अपनी प्रमुख मांगें इस प्रकार रखी हैं—

मासिक वेतन में बढ़ोतरी की जाए, क्योंकि मौजूदा मेहनताना काम के हिसाब से कम है।
महीने में 3 दिन छुट्टी दी जाए, वह भी बिना सैलरी कटौती के।
सभी कामवाली बाइयों के लिए आई-कार्ड बनाए जाएं, ताकि पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अटल आवास से विजयापुरम तक का पुराना रास्ता खोला जाए, या फिर आने-जाने के लिए अलग से भाड़ा दिया जाए।
घर-घर दिखा हड़ताल का असर
हर दिन की तरह सुबह गृहणियां घरेलू कामों के लिए बाइयों का इंतजार करती रहीं, लेकिन झाड़ू-पोछा, बर्तन और खाना बनाने वाली महिलाएं कहीं नजर नहीं आईं। काम बंद होने से घरों की महिलाओं की मुश्किलें काफी बढ़ गईं।

पुलिस बुलाने की धमकी का आरोप
धरने पर बैठी बाइयों का आरोप है कि सोसायटी के कुछ लोगों ने उन्हें वहां से हटने को कहा और पुलिस बुलाने की धमकी दी।
कामवाली बाइयों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी।

गृहणियां परेशान, समाधान की उम्मीद
हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशानी गृहणियों को उठानी पड़ी। कई महिलाओं का कहना है कि
“एक दिन भी बिना बाइयों के घर संभालना मुश्किल हो गया है।” अब सभी की नजरें प्रशासन और सोसायटी प्रबंधन पर टिकी हैं कि इस विवाद का कब और कैसे समाधान निकलता है।

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