22 जनवरी तक होगी मतदाताओं की सुनवाई, इसके बाद कट सकते हैं नाम, 55 हजार से अधिक वोटरों को अब तक नहीं मिला नोटिस, प्रक्रिया पर उठे सवाल


बिलासपुर।
जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने की आशंका गहराने लगी है। चुनाव आयोग के निर्देश पर 22 जनवरी तक दावा-आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया तय की गई है। इसके बाद नई मतदाता सूची जारी की जाएगी। हालांकि, नोटिस तैयार करने और वितरण में हुई देरी के कारण 55 हजार से अधिक मतदाताओं की अब तक सुनवाई ही नहीं हो सकी है।
जिले में कुल 12 लाख 88 हजार 242 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल हैं। इनमें से 1 लाख 2 हजार 952 मतदाताओं को बीएलओ द्वारा नोटिस दिए जा रहे हैं। ये वे मतदाता हैं, जिन्होंने 2003 की मतदाता सूची में अपने या अपने माता-पिता के नाम दर्ज होने का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है। ऐसे मतदाताओं को अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए 11 निर्धारित दस्तावेजों में से कोई एक सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
55 हजार 903 मतदाताओं को अब तक नोटिस नहीं
स्थिति यह है कि सुनवाई की अंतिम तारीख नजदीक आने के बावजूद 55 हजार 903 मतदाताओं को अब तक नोटिस नहीं मिल सका है। इसकी वजह नोटिस तैयार करने में देरी और बीएलओ द्वारा समय पर वितरण न होना बताया जा रहा है। कई जगहों पर तो सुनवाई की तारीख निकल जाने के बाद नोटिस मिलने की शिकायतें सामने आई हैं।
बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र में केवल 15 प्रतिशत मतदाताओं को ही नोटिस मिल पाया है। अन्य विधानसभाओं में भी हालात कुछ ऐसे ही बताए जा रहे हैं, हालांकि अधिकारी इसे प्रक्रियाधीन बताते हुए स्पष्ट आंकड़े देने से बच रहे हैं।
एक वार्ड में 1500 वोटर सी कैटेगरी में
निगम के पूर्व सभापति शेख नजीरुद्दीन ने वार्ड क्रमांक 26 में करीब 1500 मतदाताओं को सी कैटेगरी में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी संजय अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर कहा कि वार्ड के अधिकांश मतदाता आर्थिक रूप से कमजोर हैं और किराए के मकानों में रहते हैं। उनके पास जन्म प्रमाण पत्र जैसे अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। 2003 की मतदाता सूची में नाम होना ही उनकी पहचान का एकमात्र आधार है। यदि यही स्थिति रही तो बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि समय पर प्रस्तुत मामलों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
विसंगतियों के मामले आए सामने
एसआईआर प्रक्रिया में कई विसंगतियों के मामले भी सामने आए हैं। तालापारा निवासी दीपक बंसोड़ के मामले में उनके बेटे दीक्षांत का नाम वैध माना गया, जबकि बेटी संजना को सी कैटेगरी में डालकर प्रमाण मांगा गया।
इसी तरह जेबुनिसा (जन्म 1948) का नाम 2003 की सूची में होने के बावजूद उन्हें नोटिस मिला। शमा परवीन, नाजिया बेगम, अमीर अली और उनकी पत्नी हसीना बेगम जैसे कई मामलों में भी 2003 की सूची में नाम होने के बाद नोटिस जारी किए जाने से मतदाता परेशान हैं।
अधिकारी बोले—घबराने की जरूरत नहीं
उप जिला निर्वाचन अधिकारी शिवकुमार बनर्जी ने कहा कि
“22 जनवरी तक मिलने वाले सभी दावा-आपत्तियों की जांच की जाएगी। उसी के आधार पर नई मतदाता सूची तैयार होगी। किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। जो वास्तव में पात्र मतदाता हैं, उनके नाम सूची से नहीं हटाए जाएंगे। सी कैटेगरी के मतदाताओं को नोटिस जारी कर जांच की जा रही है।”
अब देखना होगा कि शेष बचे समय में सभी प्रभावित मतदाताओं तक नोटिस पहुंच पाते हैं या नहीं, और क्या वे अपने मताधिकार को समय रहते सिद्ध कर पाते हैं।

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