

बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद के दौरान एक वरिष्ठ कथाकार के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर साहित्य जगत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जनवादी लेखक संघ सहित कई साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से घटना की कड़ी निंदा की है।
जानकारी के अनुसार साहित्य अकादमी, नई दिल्ली एवं गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा बुधवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया था। परिसंवाद का विषय “समकालीन हिंदी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ” था। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल निर्धारित विषय पर चर्चा करने के बजाय अपनी व्यक्तिगत कहानी सुनाने लगे। इसी दौरान उन्होंने वरिष्ठ कथाकार मनोज रूपड़ा से यह टिप्पणी कर दी कि “भाई साहब, आप बोर तो नहीं हो रहे हैं।”
इस पर कथाकार मनोज रूपड़ा ने विषय पर बोलने का आग्रह किया, जिससे कुलपति प्रो. चक्रवाल कथित रूप से नाराज हो गए और उन्होंने कथाकार को मंच से बाहर निकाल दिया। इस घटना के बाद पूरे दिन गुरुवार को सोशल मीडिया सहित साहित्यिक हलकों में इस व्यवहार को लेकर व्यापक चर्चा और विरोध देखने को मिला।
मामले को गंभीर बताते हुए कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने गुरुवार को राष्ट्रपति के नाम पत्र लिखकर कुलपति को पद से हटाने की मांग की है। पत्र में विधायक ने कहा कि कुलपति का आचरण अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक और विश्वविद्यालय की गरिमा के प्रतिकूल है। उन्होंने कहा कि इस घटना से देशभर से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों में रोष है तथा विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंची है।
विधायक श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने संवाद की मर्यादा का उल्लंघन किया और शैक्षणिक मंच को विवाद का केंद्र बना दिया। उन्होंने मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति को तत्काल पद से हटाया जाए तथा उनके कार्यकाल के दौरान की गई सभी नियुक्तियों और आदेशों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं, वहीं साहित्यिक संगठनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
