

बिलासपुर। लगातार बढ़ते काम के दबाव और गैर-शैक्षणिक कार्यों की अधिकता से परेशान होकर जिले के सात संकुल समन्वयकों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। संकुल समन्वयकों का आरोप है कि शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ उन पर ऐसे कार्य थोपे जा रहे हैं, जिनका शिक्षा से सीधा कोई संबंध नहीं है। हालांकि, अभी तक किसी भी इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया है।
जानकारी के अनुसार शिक्षकों पर एसआईआर कार्य, स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने का दबाव, विभिन्न कारणों से नोटिस जारी करने जैसे कार्य लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एसआईआर कार्य 4 नवंबर से लगातार चल रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इसके अलावा कोर्ट के निर्देशों के तहत आवारा कुत्तों और मवेशियों पर नियंत्रण जैसे कार्यों की जिम्मेदारी भी शिक्षकों पर डाली गई है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर सामने आ रही है। शिक्षकों का कहना है कि एक के बाद एक जिम्मेदारियां मिलने के कारण न तो वे बच्चों को ठीक से पढ़ा पा रहे हैं और न ही अपने परिवार को समय दे पा रहे हैं। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 90 प्रतिशत परीक्षा परिणाम का लक्ष्य तय किए जाने से मानसिक दबाव और बढ़ गया है।
इन्हीं कारणों से गुरुवार को शहरी क्षेत्र के सात संकुल समन्वयकों ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया। मामले की पुष्टि करते हुए समग्र शिक्षा विभाग के जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी) ओम पाण्डेय ने बताया कि संकुल समन्वयकों के इस्तीफे प्राप्त हुए हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें स्वीकार नहीं किया गया है।
शिक्षकों पर तहसीलदारों जैसा काम थोपने का आरोप
जिला प्रशासन द्वारा शिक्षकों को छात्रों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में 55 हजार से अधिक जाति प्रमाण पत्र बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, जिसे 15 जनवरी तक पूरा करना अनिवार्य है। अब तक लगभग 9 हजार आवेदन जमा हुए हैं, जिनमें से 3 हजार आवेदन ऑनलाइन किए जा चुके हैं।
शिक्षकों ने बच्चों से दाखिल-खारिज, ग्रामसभा प्रस्ताव, मिसल सहित अन्य दस्तावेजों की फोटोकॉपी मंगवाकर जमा कराई है। अब तहसीलदारों द्वारा सभी आवेदकों के मूल दस्तावेज ऑनलाइन स्कैन कराने के आदेश दिए गए हैं, जिससे शिक्षकों की परेशानी और बढ़ गई है। शिक्षकों का कहना है कि जो कार्य तहसीलदारों को करना चाहिए, वह उनसे कराया जा रहा है।
जिले में वर्तमान में कुल 197 संकुल समन्वयक पदस्थ हैं। बताया जा रहा है कि दो दिन पहले संकुल समन्वयकों ने काम के दबाव को लेकर अधिकारियों से चर्चा भी की थी, लेकिन संतोषजनक समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
