
शशि मिश्रा

बिलासपुर जिले की केंदा–कारीआम सड़क इन दिनों बेहद जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीर और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। सड़क जगह-जगह टूट चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण यह मार्ग खतरनाक बन गया है।
केंदा से कारीआम तक का सफर अब किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है, जिससे वाहन पत्थरों और मलबे पर उछलते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। रात के समय अंधेरा और उड़ती धूल स्थिति को और गंभीर बना देती है, जिससे गड्ढे दिखाई नहीं देते और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

यह मार्ग दुपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ-साथ भारी वाहनों के लिए भी बेहद जोखिम भरा हो गया है। लगातार शिकायतों के बाद लोक निर्माण विभाग ने सड़क मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। विभाग द्वारा पुराने डामर को हटाकर सड़क को समतल किया जा रहा है और गड्ढों को भरा जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि यह पैचवर्क फिलहाल अस्थायी राहत देगा और महीने के अंत तक सड़क को चलने लायक बना दिया जाएगा। सड़क की खराब स्थिति के कारण अमरकंटक और गौरेला–पेंड्रा–मरवाही की ओर जाने वाले कई वाहन वैकल्पिक रूप से बेलगहना–कोंचरा मार्ग का उपयोग कर रहे हैं, जिससे वहां यातायात का दबाव बढ़ गया है।
भविष्य में स्थायी समाधान के रूप में एनएच-45 पर एलीवेटेड हाईवे बनाने की योजना प्रस्तावित है। 219 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस हाईवे के तैयार होने के बाद घाटी क्षेत्र के करीब 10 खतरनाक मोड़ समाप्त हो जाएंगे, जिससे आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकेगा।
फिलहाल क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जारी मरम्मत कार्य से उन्हें जल्द ही खराब सड़क और गड्ढों की समस्या से राहत मिलेगी।
