

बिलासपुर।
नए साल के पहले ही दिन बिलासपुर शहर की आधी आबादी को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा। बिरकोना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) में तकनीकी खराबी के चलते शहर की जलापूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। हालात ऐसे बने कि टैंकर से पानी लेने के लिए लोगों को आपस में झगड़ना पड़ा और कई इलाकों में मारपीट की स्थिति तक बन गई।
करीब एक माह पहले नहर की सफाई के नाम पर 19 दिनों तक जलापूर्ति बंद रहने से लोग अभी उबर भी नहीं पाए थे कि अब सेटलिंग टैंक में एयर लॉक और चेंबर वाल्व फटने की समस्या ने पूरे सिस्टम को ठप कर दिया। रेलवे कॉलोनी, गणेश नगर, कपिल नगर सहित कई क्षेत्रों में जलापूर्ति पूरी तरह बंद रही। लोगों के विरोध और हंगामे के बाद नगर निगम ने तकनीकी खराबी की जानकारी दी।
टैंकर व्यवस्था भी फेल
नगर निगम ने टैंकरों से पानी सप्लाई का दावा किया, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट रही। तालापारा सहित कई इलाकों में जंग लगे, बिना ढक्कन वाले जर्जर टैंकर भेजे गए, जिनसे कई परिवारों को एक बाल्टी पानी भी नसीब नहीं हुआ। जहां पांच टैंकरों की जरूरत थी, वहां केवल एक टैंकर पहुंचा। निगम के पास महज 8 टैंकर होने से 40 हजार घरों तक पानी पहुंचाना असंभव साबित हुआ।
122 पंप भी नाकाम
निगम ने बंद पड़े 122 पंप चालू करने का दावा किया, लेकिन अधिकांश पंपों से पानी की जगह हवा निकली। अरपापार और सरकंडा क्षेत्र के नूतन चौक, पटवारी प्रशिक्षण केंद्र और अशोक नगर जैसे इलाकों में लो प्रेशर के कारण सप्लाई नहीं हो पाई। अमृत मिशन की 276 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन पूरी तरह सूख चुकी है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं।
सात दिन बाद ही राहत की उम्मीद
नगर निगम के अनुसार, बिरकोना फिल्टर प्लांट में पुराने चेंबर को तोड़कर नया कंक्रीट चैंबर बनाया गया है। इस चैंबर को पूरी तरह मजबूत होने और सूखने में सात दिन लगेंगे। आठवें दिन अमृत मिशन के तहत 22 पानी टंकियों में दोबारा सप्लाई शुरू करने का दावा किया जा रहा है। तब तक व्यापार विहार पानी टंकी से जुड़े इलाकों—तालापारा, मरीमाई चौक, भारत चौक, विनोबा नगर, क्रांति नगर, तारबाहर सहित अन्य क्षेत्रों में केवल सुबह सीमित जलापूर्ति की जाएगी।

अधिकारी बोले
कार्यपालन यंत्री प्रवीण शुक्ला ने बताया कि फिल्टर प्लांट में तकनीकी खराबी आई है और आईएचपी कंपनी द्वारा मरम्मत कार्य किया जा रहा है। प्लांट अभी पांच साल की वारंटी अवधि में है। वहीं जल विभाग के अनुपम तिवारी ने कहा कि पूरी सप्लाई सामान्य होने में कम से कम सात दिन का समय लग सकता है।
लगातार दूसरी बार एक महीने के भीतर जल संकट झेल रहे शहरवासियों में निगम की तैयारियों और अमृत मिशन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। नए साल की शुरुआत में ही सूखे नल और खाली बर्तन शहर की बड़ी आबादी की मजबूरी बन गए हैं।
