

प्रवीर भट्टाचार्य

बिलासपुर। शहर में शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ की बहुड़ा यात्रा श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के बीच संपन्न हुई। नौ दिनों तक मौसी मां (गुंडिचा मंदिर) में विश्राम करने के बाद भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर सवार होकर श्रीमंदिर लौटे। पूरे मार्ग में “जय जगन्नाथ” के जयघोष, भक्ति गीतों और कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने करीब सात किलोमीटर तक भगवान के रथ को खींचकर अपनी आस्था प्रकट की।

रेलवे उड़िया स्कूल परिसर स्थित मौसी मां मंदिर से दोपहर बाद बहुड़ा यात्रा प्रारंभ हुई। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को लगभग 20 फीट ऊंचे आकर्षक एवं सुसज्जित रथ पर विराजमान कराया गया। यात्रा प्रारंभ होने से पहले वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की गई और पारंपरिक विधि-विधान के साथ भगवान को रथ पर विराजित किया गया।
सुबह से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान

बहुड़ा यात्रा से पहले सुबह छह बजे मंगल आरती के साथ धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। इसके बाद उपचार पूजा, भोग आरती, मुख्य पूजा, आरती और पुष्पांजलि संपन्न हुई। दोपहर 12 बजे अन्नभोग लगाया गया, इसके बाद ब्राह्मण भोज आयोजित हुआ। दोपहर एक बजे ‘पहंडी’ की रस्म के तहत भगवान को गर्भगृह से बाहर लाकर रथ तक लाया गया। दोपहर 1:30 बजे गोपाल कृष्ण राय ने पारंपरिक राजा की भूमिका निभाते हुए ‘छेरापहरा’ की रस्म अदा की। इसके बाद दोपहर दो बजे श्रद्धालुओं ने रथ खींचना शुरू किया।

200 मीटर लंबी रस्सी भी पड़ी छोटी
इस वर्ष मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और उत्साह को देखते हुए रथ खींचने वाली रस्सी की लंबाई 200 मीटर कर दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को रस्सी पकड़ने का अवसर नहीं मिल सका। ऐसे श्रद्धालुओं ने रथ के किसी हिस्से को स्पर्श कर स्वयं को धन्य महसूस किया। पूरे सात किलोमीटर के मार्ग में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही और रथ खींचने का उत्साह देखते ही बन रहा था।

करीब छह घंटे में पूरी हुई सात किलोमीटर की यात्रा
बहुड़ा यात्रा तोरवा थाना, रेलवे जोन कार्यालय, पोस्ट ऑफिस, तोरवा चौक, दयालबंद चौक, गांधी चौक, टैगोर चौक, तारबाहर चौक, बड़ा गिरिजा चौक, बंगला यार्ड, रेलवे स्टेशन और तितली चौक होते हुए शाम को श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंची। करीब सात किलोमीटर लंबी इस यात्रा को पूरा होने में लगभग छह घंटे का समय लगा। पूरे मार्ग में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने स्वागत मंच लगाए, जहां श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शरबत और महाप्रसाद की व्यवस्था की गई। समिति की ओर से भी हर वर्ष की भांति 5 क्विंटल से भी अधिक महाप्रभु को प्रिय कनिका प्रसाद का वितरण किया गया।

जगह-जगह हुआ स्वागत, गूंजते रहे जयघोष
यात्रा मार्ग के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए खड़े रहे। महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने फूल बरसाकर भगवान का स्वागत किया। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन मंडलियों ने संकीर्तन प्रस्तुत किया, जबकि विभिन्न संस्थाओं ने प्रसाद वितरण किया। पूरे मार्ग में “जय जगन्नाथ” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
श्रीमंदिर पहुंचने पर महाआरती, कल होगा स्वर्ण श्रृंगार
शाम को बहुड़ा यात्रा के श्रीमंदिर पहुंचने पर भगवान की महाआरती की गई और श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण हुआ। इसके साथ ही भगवान के दर्शन के लिए मंदिर के पट पुनः खुल गए। शनिवार सुबह भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का पुरी से मंगाए गए स्वर्ण आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद आरती एवं नियमित पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
रसगुल्ले से मना रूठीं देवी लक्ष्मी
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी मां के घर चले गए थे, जिससे देवी लक्ष्मी उनसे नाराज हो गई थीं। जब भगवान वापस श्रीमंदिर लौटे तो देवी लक्ष्मी ने उन्हें तुरंत मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया। काफी मान-मनौव्वल के बाद भगवान ने देवी लक्ष्मी को उनका प्रिय रसगुल्ला अर्पित कर मनाया। इसके बाद देवी ने प्रसन्न होकर भगवान को श्रीमंदिर में प्रवेश की अनुमति दी। यह परंपरा बहुड़ा यात्रा का महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक हिस्सा मानी जाती है। महाप्रभु एक बार पुनः श्री मंदिर पहुंच चुके हैं जहां वे नियमित रूप से भक्तों को दर्शन देंगे और अपने चका नयन से निहार कर उन्हें निहाल करेंगे।
