

बिलासपुर सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि महापर्व के अवसर पर प्रतिदिन प्रातः 5:00 बजे श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन एवं श्रृंगार, श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का महारुद्राभिषेक, श्री महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती देवी का श्रीसूक्त षोडश मंत्रों से दुग्धाभिषेक, मर्यादा पुरुषोत्तम परमब्रह्म श्रीरामचंद्र जी का पूजन-श्रृंगार तथा सिद्धिविनायक भगवान का विशेष पूजन किया जा रहा है। प्रतिदिन रात्रि 8:00 बजे से 12:30 बजे तक श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ सम्पन्न होता है, जिसके उपरांत भव्य महाआरती आयोजित की जाती है।

गुप्त नवरात्रि के पर्व पर माँ ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का छठी महाविद्या माँ छिन्नमस्तिका देवी के स्वरूप में विशेष पूजन, दिव्य श्रृंगार एवं गुप्त आराधना की जाएगी।
पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि माँ छिन्नमस्तिका परम त्याग, आत्मबल और जागृत चेतना की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी साधना से साधक की मानसिक शक्ति, एकाग्रता एवं कुंडलिनी जागरण में सहायता मिलती है। साथ ही शत्रु बाधा, न्यायालय संबंधी विवाद, आर्थिक संकट, तनाव एवं नकारात्मकता से मुक्ति प्राप्त होती है तथा आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है।
जप से चतुर्थ पुरुषार्थ का संतुलन
पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों का संतुलन स्थापित करना है। वर्तमान समय में मनुष्य अर्थ और काम की ओर अधिक आकर्षित होकर संतुलन खो देता है, जबकि गुप्त नवरात्रि में मंत्र-जप एवं साधना के माध्यम से इन चारों पुरुषार्थों का समन्वय संभव होता है।
उन्होंने कहा कि मंत्र-जप से धर्म का जागरण होता है, जिससे कर्तव्यबोध उत्पन्न होता है। पवित्र विचारों के कारण अर्थ का अर्जन सदाचारपूर्ण मार्ग से होता है। जप मन एवं इंद्रियों को संयमित कर काम अर्थात इच्छाओं को मर्यादित करता है। जब धर्म, अर्थ और काम संतुलित होते हैं, तब साधक स्वाभाविक रूप से मोक्ष अर्थात आत्मिक शांति एवं परम कल्याण की ओर अग्रसर होता है। जप भौतिक जीवन और आध्यात्मिक उन्नति के बीच संतुलन स्थापित करने का सर्वोत्तम साधन है।
