
साहित्यिक मंच स्पन्दन पर दिनांक 16.07.2026 को आभासीय साहित्य संध्या आयोजित की गई. सभा का आरम्भ चेन्नई की युवा साहित्यकार मोनिका डागा द्वारा सरस्वती वंदना की मधुर प्रस्तुति से हुआ. तदोपरांत लंदन से कार्यक्रम में जुड़े भोपाल के वरिष्ठ साहित्यिशिल्पी श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ने अपनी रचना ‘कविता’ प्रस्तुत कर कविता के अर्थ को परिभाषित कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. मोनिका डागा की रचना ‘मुझे अब भय नहीं लगता’ भी प्रभावी रही. दिल्ली की निशि अरोड़ा की रचना ‘भीष्म का देह त्याग’ सुन सभा में उपस्थित जन भावविभोर हो गए. गुरुग्राम की प्रीति अग्रवाल ने ‘ईमानदारी से खेलो’ सस्मरण द्वारा जीवन में ईमानदारी के महत्व पर बल दिया. दिल्ली की अलका गुप्ता ने अपनी लघु कविता ‘मोटी सी रोटी’ द्वारा स्त्रीमन की व्यथा का मार्मिक चित्रण किया. मेरठ की नीलमणि का राममंदिर में घटित घटना पर व्यंग्य भी आकर्षक रहा. लखनऊ की लेखिका ऋचा उपाध्याय ने अपनी रचना ‘जब भी युद्ध होता है’ में युद्ध के गंभीर दुष्परिणामों का सजीव वर्णन किया. स्पन्दन मंच के संस्थापक उज्जैन के प्रशांत माहेश्वरी ने अपनी रचना ‘वन का वीर’ में एक पुष्प के जीवन संघर्ष को अभिव्यक्त किया. अलीगढ़ की डॉ. आभा माहेश्वरी द्वारा प्रस्तुत कृष्ण भजन भी अत्यंत मनोहारी रहा. अन्त में प्रीति अग्रवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम सहर्ष सम्पन्न हुआ.
