
बिलासपुर। सरकंडा स्थित संभागीय बाल संप्रेक्षण गृह से चौकीदार की हत्या कर फरार हुए चार अपचारी बालकों की फरारी पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या के मामले में बंद मुख्य आरोपी पिछले एक सप्ताह से साथियों के साथ भागने की योजना बना रहा था। वह अन्य अपचारी बालकों का सरगना बन चुका था और उनसे अपने सभी काम भी कराता था। घटना के 72 घंटे बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश से एक अपचारी बालक को पकड़ लिया है, जबकि तीन की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी ने अपने चाचा के साथ मिलकर कोरबा के एक फार्म हाउस में चोरी की नीयत से घुसने के दौरान सुरक्षा गार्ड की हत्या की थी। इस मामले में उसे 14 वर्ष की सजा सुनाई जा चुकी थी और सात दिन बाद उसे सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया जाना था। इससे पहले ही उसने अपने तीन साथियों के साथ चौकीदार की हत्या कर बाल संप्रेक्षण गृह से फरार होने की वारदात को अंजाम दे दिया।
चारों अपचारी हत्या, दुष्कर्म, एनडीपीएस और चोरी जैसे गंभीर मामलों में कोरबा और रायगढ़ से बाल संप्रेक्षण गृह भेजे गए थे। पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी रोजाना साथियों के साथ भागने की योजना पर चर्चा करता था, लेकिन इसकी भनक अधिकारियों को नहीं लग सकी।
गार्ड की बाइक की चाबी लेकर हुए फरार
जांच में सामने आया कि ड्यूटी पर आने वाले कर्मचारी और गार्ड अपनी बाइक की चाबी व अन्य सामान अधीक्षक कक्ष में रखकर भीतर जाते थे। मुख्य आरोपी और उसके साथियों को इसकी जानकारी थी। चौकीदार नरेंद्र खांडे की हत्या के बाद आरोपियों ने दूसरे गार्ड की बाइक की चाबी उठाई और उसी वाहन से फरार हो गए। दूसरे चौकीदार ने पुलिस को बताया कि उसने उसी शाम बाइक में पेट्रोल भी भरवाया था।
मुख्य आरोपी बिहार का, तलाश में एसीसीयू की टीम रवाना
पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। अन्य तीन अपचारी भी पारिवारिक रूप से असहाय परिस्थितियों से जुड़े हैं। पुलिस को आशंका है कि सभी आरोपी बिहार की ओर भागे हैं। उनकी तलाश में एसीसीयू की एक विशेष टीम बिहार रवाना की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था में मिली गंभीर लापरवाही
घटना के बाद बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में पाया गया कि परिसर की चारदीवारी छह फीट से भी कम ऊंची है, जबकि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) आदर्श नियम, 2016 के अनुसार ऊंची दीवार और उस पर कंटीले तार होना अनिवार्य है।
मुख्य गेट पर 24 घंटे सुरक्षा की व्यवस्था भी नहीं है। दो होमगार्ड स्वीकृत होने के बावजूद वर्तमान में केवल एक होमगार्ड ही आठ घंटे की ड्यूटी कर रहा है, जबकि दूसरा लंबे समय से अनुपस्थित है। विभाग द्वारा कई बार पत्राचार के बावजूद उसकी जगह नई तैनाती नहीं की गई।
50 की क्षमता, घटना के समय 47 अपचारी थे मौजूद
संभाग स्तरीय दो मंजिला बाल संप्रेक्षण गृह की क्षमता 50 बालकों की है। घटना के समय यहां 47 अपचारी बालक रह रहे थे, जिनमें दूसरी मंजिल पर चारों फरार अपचारी समेत 25 और निचली मंजिल पर 22 बालक थे। चार अपचारी बालकों के फरार होने के बाद अब गृह में 43 बालक शेष हैं।
पुलिस फरार तीनों अपचारी बालकों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
