

सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महापर्व भव्यता के साथ मनाया जा रहा है।पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के सानिध्य में नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का द्वितीय महाविद्या माँ तारा के स्वरूप में विशेष पूजन-अर्चन किया गया। इससे पूर्व, महायज्ञ के प्रथम दिन अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना, अखंड ज्योति प्रज्वलन, ध्वजारोपण एवं ज्वारोपण की वैदिक विधियां श्रद्धापूर्वक संपन्न की जा चुकी हैं।

दूसरे दिन माँ तारा साधना के अद्भुत लाभ एवं महात्म्य
महाराज श्री के अनुसार, द्वितीय महाविद्या माँ तारा ‘तारने वाली’ देवी हैं, जो संसार रूपी कठिन सागर से अपने भक्तों का उद्धार करती हैं। उनकी साधना से निम्न लाभ प्राप्त होते हैं:
आर्थिक समृद्धि और वाक-सिद्धि: माँ तारा की साधना से दरिद्रता का नाश होता है। साधक को तीव्र बुद्धि, ज्ञान और अद्भुत वाक-शक्ति (बोलने की कला) प्राप्त होती है।
घोर संकटों से मुक्ति: इन्हें ‘उग्रतारा’ भी कहा जाता है, जो जीवन में अचानक आने वाली बड़ी से बड़ी विपत्तियों और कठिन से कठिन संकटों को पल भर में दूर कर देती हैं।
मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति: माँ तारा अपने साधकों को भवसागर से तार कर आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाती हैं और अंततः मोक्ष प्रदान करती हैं।
शत्रु और मुकदमों में विजय: माँ तारा के प्रभाव से शत्रुओं के षड्यंत्र विफल हो जाते हैं और वाद-विवाद या अदालती मामलों में सफलता मिलती है।
पीतांबरा पीठ में चल रहे हवनात्मक महायज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 33,600 आहुतियां प्रदान की गयी । इस पावन अवसर पर मंदिर में दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
