
15 जुलाई से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, शत्रुओं पर विजय और आंतरिक शुद्धि का है महापर्व।*
13 जुलाई से प्रारंभ होकर 23 नवंबर (वैकुंठ चतुर्दशी) तक चलेगा 134 दिवसीय ऐतिहासिक श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ।*
यज्ञ कुंड में दी जाएंगी माता बगलामुखी के महामंत्रों से 36 लाख दिव्य आहुतियां; पूर्णाहुति पर होगा 1100 कन्याओं का पूजन।*
सनातन धर्म में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। आमतौर पर जनमानस केवल वर्ष में आने वाली दो प्रकट नवरात्रियों (चैत्र व शारदीय) से ही परिचित है, लेकिन तंत्र शास्त्र, गुप्त साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा के संचय के लिए दो ‘गुप्त नवरात्रियाँ’ (माघ और आषाढ़) सर्वोपरि मानी गई हैं। इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से 22 जुलाई तक पूरे देश सहित न्यायधानी बिलासपुर में परम श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी।

इसी पावन उपलक्ष्य में श्री पीतांबरा पीठ (सुभाष चौक, सरकंडा, बिलासपुर) में लोक-कल्याण की कामना के साथ एक ऐतिहासिक 134 दिवसीय श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ का शंखनाद होने जा रहा है।
क्यों सर्वोपरि है गुप्त नवरात्रि और ‘दस महाविद्या’ साधना?–
पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के अनुसार, आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि लोक-कल्याण, आंतरिक शुद्धि और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने का सबसे बड़ा महापर्व है। ‘गुप्त’ शब्द का सीधा अर्थ गोपनीयता से है। तंत्र शास्त्र का नियम है— “गोप्यते इति गुप्तम्” अर्थात् जो साधना जितनी गुप्त रखी जाती है, वह उतनी ही तीव्र गति से फल देती है। प्रकट नवरात्रि गृहस्थों के लिए सुख-समृद्धि की होती है, जबकि गुप्त नवरात्रि साधकों द्वारा अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा, कुंडलिनी शक्ति और दसों दिशाओं को सुरक्षित करने के लिए की जाती है।
ऋषि श्रृंगी की कथा का उल्लेख करते हुए आचार्य जी ने बताया कि कैसे एक दुखी महिला ने उनके निर्देश पर गुप्त रूप से माँ दुर्गा की आराधना की, जिससे उसके पति का हृदय परिवर्तन हुआ और घर पुनः ऐश्वर्य से भर गया। तभी से इस गुप्त साधना का विधान लोक में प्रतिष्ठित हुआ। इस नवरात्रि में नौ देवियों के साथ-साथ ब्रह्मांड की दसों दिशाओं से दैवीय ऊर्जा को सोखने वाली *दस महाविद्याओं (दस परम शक्तियों) की गुप्त साधना की जाती है:
1 माँ काली* माँ काली आदि शक्ति का सबसे उग्र और शक्तिशाली रूप काल (समय) और शत्रुओं पर विजय हैं। इनकी आराधना से साधक को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है, सभी प्रकार के नकारात्मक तंत्र-मंत्र का नाश होता है और जीवन के कठिन संघर्षों में निश्चित विजय प्राप्त होती है।
2 माँ तारा* घोर संकटों से मुक्ति और मोक्ष | माँ तारा को ‘तारिणी’ भी कहा जाता है, जो संसार रूपी सागर से पार लगाती हैं। जब जीवन में घोर आर्थिक या मानसिक संकट आ जाए, तो माँ तारा की कृपा से मार्ग तुरंत सुलभ हो जाता है। यह ज्ञान, वाकसिद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं।
3 माँ त्रिपुर सुंदरी* सौंदर्य, आकर्षण और लौकिक सुख | इन्हें ‘ललिता’ या ‘षोडशी’ भी कहते हैं। माँ त्रिपुर सुंदरी की साधना से व्यक्ति के व्यक्तित्व में चुंबकीय आकर्षण पैदा होता है। यह संसार के समस्त भौतिक सुख, ऐश्वर्य, भोग और अंत में परम मोक्ष प्रदान करने वाली सात्विक ऊर्जा हैं।
4 माँ भुवनेश्वरी सृष्टि का ऐश्वर्य और ज्ञान | माँ भुवनेश्वरी पूरे ब्रह्मांड (भुवन) की स्वामिनी हैं। इनकी कृपा से साधक को समाज में मान-सम्मान, उच्च पद, भूमि-भवन और अपार ख्याति मिलती है। यह जीवन को पूरी तरह से अभावमुक्त और समृद्ध बना देती हैं।
5 माँ भैरवी* भय का नाश और आत्मबल की प्राप्ति |माँ भैरवी तेज, तप और संहार की शक्ति हैं। इनकी आराधना से भीतर छिपे डर, मानसिक अवसाद और संकोच का पूरी तरह नाश होता है। यह साधक को अपार आत्मबल, निडरता और हर विपरीत परिस्थिति से लड़ने का साहस देती हैं।
6 माँ छिन्नमस्ता माँ छिन्नमस्ता का रूप अत्यंत गोपनीय और तीव्र है। यह मानसिक विकारों और अहंकार का अंत कर चेतना के सर्वोच्च स्तर और कुंडलिनी जागरण की देवी हैं। इनकी कृपा से व्यक्ति का झूठा अहंकार, काम, क्रोध और मानसिक भ्रम नष्ट हो जाते हैं, जिससे तीव्र आत्म-ज्ञान की प्राप्ति होती है।
7 माँ धूमावती माँ धूमावती को संकटों को सोखने वाली दरिद्रता, रोग और दुखों का हरण करने वाली वृद्ध देवी मानी जाती है। जीवन में जब दरिद्रता, बीमारी, अकेलेपन या भारी दुर्भाग्य का वास हो, तब माँ धूमावती की साधना शत्रुओं और दुखों को भस्म कर साधक को परम वैराग्य और आत्मिक शांति देती हैं।
8 माँ बगलामुखी माँ बगलामुखी ‘पीताम्बरा’ के नाम से भी जानी जाती हैं। इन्हें स्तंभन की देवी कहा जाता है, जो शत्रुओं की बोलती बंद कर देती हैं। इनकी उपासना विशेष रूप से वाद विवाद शास्त्रार्थ मुकदमे में विजय प्राप्त करने के लिए, कोई आप पर अकारण अत्याचार कर रहा हो ते उसे रोकने सबक सिखाने, असाध्य रोगों से छुटकारा, बंधन मुक्त, संकट से उद्धार, उवद्रवो की शांति, ग्रह शांति,संतान प्राप्ति, एवं सभी प्रकार के मनोरथ को पूर्ण करने वाली है, शत-प्रतिशत सफलता के लिए इनकी साधना अचूक मानी जाती है।
9 माँ मातंगी कला, संगीत और बुद्धि की प्राप्ति माँ मातंगी तंत्र की सरस्वती हैं। कला, संगीत, लेखन, और वाकपटुता के क्षेत्र में शीर्ष पर पहुँचने के लिए इनकी आराधना की जाती है। इनकी कृपा से व्यक्ति के वचनों में वशीकरण की शक्ति आ जाती है और गृहस्थ जीवन सुखमय बनता है।
10 माँ कमला माँ कमला साक्षात तांत्रिक लक्ष्मी हैं जोकि अखंड धन-धान्य और समृद्धि की कारक हैं। कमल के आसन पर विराजमान माँ की कृपा जिस पर हो जाए, उसके जीवन से दरिद्रता हमेशा के लिए मिट जाती है। यह व्यापार में उन्नति, अखंड धन-दौलत, सुख-समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाली परम कल्याणी हैं।
वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक महत्व
यह पर्व पूरी तरह वैज्ञानिक है। आषाढ़ का महीना ग्रीष्म ऋतु के अंत और वर्षा ऋतु के प्रारंभ का ‘संधिकाल’ (ऋतु परिवर्तन का समय)होता है। इस समय हवा में बैक्टीरिया और बीमारियां बढ़ती हैं, जिससे बचाव के लिए नौ दिनों का उपवास और सात्विक आहार शरीर को शुद्ध करता है। मंदिर में होने वाले अखंड हवन के धुएं और विशेष मंत्रों के कंपन से पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो जाता है।
श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में 134 दिवसीय महाआयोजन
पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के सानिध्य में इस वर्ष का आयोजन अत्यंत भव्य होने जा रहा है। 15 से 22 जुलाई तक चलने वाली गुप्त नवरात्रि* में माता बगलामुखी देवी का विशेष पूजन, महाआरती और दस महाविद्याओं का अर्चन किया जाएगा।
इसके साथ ही, लोक-कल्याण हेतु आयोजित दिव्य पीताम्बरा महायज्ञ आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी,सोमवार, 13 जुलाई से प्रारंभ होकर निरंतर 134 दिनों तक अनवरत चलेगा, जिसका समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्दशी (वैकुंठ चतुर्दशी) सोमवार, 23 नवंबर को होगा।
महायज्ञ की मुख्य विशेषताएं:
36,00,000 (छत्तीस लाख) दिव्य आहुतियां: महायज्ञ के दौरान माता बगलामुखी देवी के महामंत्रों द्वारा पूरे विधि-विधान से यज्ञ कुंड में आहुतियां अर्पण की जाएंगी।
1100 कन्या पूजन: 23 नवंबर को महायज्ञ की पूर्णाहुति के पावन अवसर पर पीठ के पवित्र प्रांगण में 1100 कन्याओं का भव्य पूजन एवं भोजन आयोजित होगा।
पीठाधीश्वर जी का संदेश–
“गुप्त नवरात्रि भटकाव से निकलकर स्वयं के भीतर झांकने का समय है। माँ पीतांबरा और त्रिदेवों की कृपा पाने के लिए भक्तों को इन नौ दिनों (15 से 22 जुलाई) में सात्विकता अपनाकर मानसिक रूप से माँ का ध्यान अवश्य करना चाहिए।”
श्री पीतांबरा पीठ प्रबंधन ने समस्त श्रद्धालु भक्तों को इस अलौकिक महायज्ञ की ऊर्जा का हिस्सा बनने, यज्ञ में आहुति प्रदान करने और अपने परिवार की सुख, समृद्धि व दीर्घायु के लिए पुण्य का भागी बनने हेतु सादर आमंत्रित किया है।
