

बिलासपुर। ने बुधवार को बिलासपुर में 47 मामलों की सुनवाई की। इनमें सबसे चर्चित मामला दो नाबालिग बेटियों का रहा, जिन्होंने आयोग के समक्ष आरोप लगाया कि उनके पिता ने भरण-पोषण देने से बचने के लिए उनकी मां को झूठे एनडीपीएस मामले में फंसा दिया। इस मामले की सुनवाई करीब एक घंटे तक चली।
बेटियों ने आयोग को बताया कि उनके माता-पिता पिछले 14 वर्षों से अलग रह रहे हैं। आरोप है कि पिता, जिनका मेडिकल स्टोर है, ने घर की छत पर करीब तीन हजार नशीली गोलियां रखवाकर पुलिस से जब्ती कराई और उनकी मां को एनडीपीएस मामले में फंसा दिया। वर्तमान में उनकी मां जेल में हैं। बेटियों ने दावा किया कि यह सब भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए किया गया।

महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि प्रथम दृष्टया पुलिस की जांच पूरी तरह संतोषजनक नहीं लगती। आयोग ने पुलिस को जब्त दवाओं की दोबारा जांच कराने तथा संबंधित मेडिकल स्टोर से दवाओं की खरीदी-बिक्री का रिकॉर्ड खंगालने के निर्देश दिए हैं, ताकि वास्तविक आरोपी तक पहुंचा जा सके। आयोग ने महिला को भरण-पोषण के लिए न्यायालय जाने और यदि पति ने दूसरी शादी की है तो उसके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी।
अन्य मामलों में भी दिए महत्वपूर्ण निर्देश
सुनवाई के दौरान एक मामले में आवेदिका की जाति और पहचान को लेकर विवाद सामने आया। अनावेदक पक्ष ने आरोप लगाया कि आवेदिका यादव जाति की होने के बावजूद खुद को गोड़ बताकर आधार कार्ड बनवा रही है। आयोग ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
एक अन्य मामले में महिला ने पति पर दूसरी शादी करने और भरण-पोषण नहीं देने का आरोप लगाया। आयोग ने महिला को दूसरी शादी को शून्य घोषित कराने के लिए न्यायालय में कार्रवाई करने की सलाह दी। साथ ही समाज स्तर पर हुए समझौते के तहत महिला को एक लाख रुपये दिलाए गए।
वहीं, मल्हार थाने में पदस्थ एक सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने की शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं होने का मामला भी आयोग के सामने आया। आयोग ने इस मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
दो कार्यकाल का कार्यकाल समाप्ति की ओर
महिला आयोग की अध्यक्ष का कार्यकाल अब समाप्त होने वाला है। लगातार दो कार्यकाल तक अध्यक्ष रहीं डॉ. नायक ने अपने कार्यकाल में प्रदेशभर में 411 मामलों की सुनवाई की, जिनमें बिलासपुर की 23 सुनवाई शामिल हैं। वे पेशे से अधिवक्ता हैं और रायपुर की पूर्व महापौर भी रह चुकी हैं। उनके कार्यकाल के दौरान नगर निगम चुनाव में अपने देवर के पक्ष में प्रचार करने के आरोप को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया था।
