

पीड़िता की मां का आरोप: एफआईआर में देरी की, सबूत नष्ट करने और समझौते के लिए बनाया गया दबाव; तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
विशेष संवाददाता, बिलासपुर
सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में दो मासूम सगी बहनों के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अब पुलिस की जांच और उसकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित बच्चियों की मां ने केंद्रीय गृह मंत्री को एक लिखित शिकायत पत्र भेजकर स्थानीय पुलिस पर जांच में लापरवाही बरतने, साक्ष्य मिटाने की कोशिश करने और आरोपियों के पक्ष में समझौते के लिए दबाव बनाने का संगीन आरोप लगाया है। पीड़िता की मां ने सिरगिट्टी थाना प्रभारी (TI) समेत तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई FIR
केंद्रीय गृह मंत्री को भेजे गए शिकायत पत्र के अनुसार, घटना की सूचना दिए जाने के बावजूद सिरगिट्टी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की। पीड़ित परिवार को न्याय के लिए दिनभर थाने और आला अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। परिवार का दावा है कि जब मामले में उच्च स्तर से हस्तक्षेप हुआ, तब कहीं जाकर पुलिस ने मामला दर्ज किया।
साक्ष्य जुटाने में लापरवाही और मानसिक प्रताड़ना का आरोप
पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान बच्चियों ने बताया था कि वारदात के वक्त आरोपी उन्हें रस्सी से बांधते थे। परिवार ने पुलिस से तत्काल उस रस्सी और घटनास्थल से जुड़े अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच कराने का लिखित व मौखिक अनुरोध किया था। लेकिन पुलिस ने इसमें ढिलाई बरती, जिससे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सबूतों के नष्ट होने या प्रभावित होने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।
इसके अलावा, शिकायत में यह भी कहा गया है कि नियमानुसार संवेदनशील मामलों में बच्चियों की मानसिक स्थिति का ध्यान रखने के बजाय, उन्हें बार-बार थाने बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। आरोप है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने आरोपी पक्ष का परिचित और पड़ोसी होने का हवाला देते हुए पीड़ित परिवार पर मामले को रफा-दफा करने और समझौता करने का अनुचित दबाव भी बनाया।
सुरक्षा की गुहार और सहमा हुआ परिवार
शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपी पक्ष की ओर से लगातार उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है, जिससे पूरा परिवार खौफ के साए में जीने को मजबूर है। स्थानीय स्तर पर गुहार लगाने के बाद भी पीड़ित परिवार को अब तक कोई सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई है। मामले में मुख्य रूप से सिरगिट्टी थाना प्रभारी अभय सिंह बैस, उप निरीक्षक शीतल प्रसाद त्रिपाठी और जांच अधिकारी संतोषी अग्रवाल को तत्काल जांच से हटाने और उनकी संदिग्ध भूमिका की विभागीय जांच कराने की मांग की गई है।
गृह मंत्री से पीड़ित परिवार की प्रमुख मांगें:
- मामले की जांच सिरगिट्टी पुलिस से हटाकर किसी वरिष्ठ और स्वतंत्र आईपीएस (IPS) अधिकारी को सौंपी जाए।
- एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी और साक्ष्य संरक्षण में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की जांच कर उन पर सख्त कार्रवाई हो।
- घटनास्थल से जुड़े सभी वैज्ञानिक साक्ष्य तत्काल एकत्र कर फॉरेंसिक लैब भेजे जाएं।
- पीड़ित बच्चियों और उनके परिजनों को तत्काल चौबीस घंटे सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
अधिकारियों का पक्ष
“पीड़िता की मां द्वारा की गई शिकायत को संज्ञान में लिया गया है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी, जिसके निर्देश एसएसपी सिटी को दे दिए गए हैं। केस में एफआईआर पहले ही दर्ज की जा चुकी है और कानून के मुताबिक कार्रवाई आगे बढ़ रही है।”
— रजनेश सिंह, एसएसपी (बिलासपुर)
