बिलासपुर में मासूमों से दरिंदगी: पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पीड़ित माँ ने केंद्रीय गृह मंत्री से लगाई न्याय की गुहार

शशि मिश्रा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में 7 और 8 साल की दो मासूम बच्चियों के साथ हुई कथित दुष्कर्म की वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया है। इस संवेदनशील मामले में अब एक नया और गंभीर मोड़ आ गया है। पुलिस की कथित लापरवाही और असंवेदनशील रवैये से नाराज पीड़ित बच्चियों की माँ ने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री को शिकायत पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। पत्र में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

FIR में देरी और साक्ष्यों की अनदेखी का आरोप

पीड़ित माँ द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री को भेजी गई शिकायत के अनुसार, घटना की जानकारी देने के बाद भी सिरगिट्टी थाना स्तर पर तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पीड़ित परिवार को दिनभर थाने और आला अधिकारियों के चक्कर काटने पड़े। काफी जद्दोजहद और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही मामला दर्ज हो सका।
शिकायत में पुलिस पर सबसे गंभीर आरोप साक्ष्यों को नष्ट होने देने का लगाया गया है। परिवार का कहना है:

  • बच्चियों ने बयान दिया था कि आरोपी गलत काम के दौरान उन्हें रस्सी से बांधता था
  • पुलिस को इन संभावित साक्ष्यों की तत्काल जब्ती और वैज्ञानिक जांच कराने के लिए कहा गया था।
  • इसके बावजूद पुलिस ने साक्ष्यों को सुरक्षित करने में लापरवाही बरती, जिससे महत्वपूर्ण सबूतों के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

बार-बार पूछताछ से मासूमों पर मानसिक दबाव, समझौते का भी प्रयास!

“चिकित्सकीय परीक्षण के बाद भी बच्चियाँ दर्द से कराहती रहीं और घटना के संकेत देती रहीं, लेकिन पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उन्हें बार-बार पूछताछ के दौर से गुजारा, जिससे वे गहरे मानसिक तनाव में हैं।” – पीड़ित पक्ष

शिकायत पत्र में यह चौकाने वाला खुलासा भी किया गया है कि जांच के दौरान पीड़ित परिवार पर मामला रफा-दफा करने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि पुलिस और संबंधित लोगों द्वारा यह कहकर समझौते की सलाह दी गई कि “आरोपी पड़ोसी और परिचित हैं।” पीड़ित परिवार का कहना है कि ऐसे सुझावों से उनका मनोबल पूरी तरह टूट गया और न्याय व्यवस्था पर से उनका भरोसा डगमगा गया। आरोप यह भी है कि पुलिस द्वारा पीड़ित के बजाय आरोपी पक्ष को विशेष महत्व दिया गया।

धमकियों के साए में जीने को मजबूर पीड़ित परिवार

वारदात के बाद से पीड़ित परिवार खौफ के साए में जीने को मजबूर है। माँ का आरोप है कि आरोपी पक्ष द्वारा उन्हें लगातार जान से मारने और अंजाम भुगतने की धमकियाँ दी जा रही हैं। बच्चियों और पूरे परिवार में डर का माहौल है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन द्वारा उन्हें अब तक कोई पर्याप्त सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई है।

पीड़ित परिवार की प्रमुख माँगें:

नाराज ग्रामीणों और परिजनों ने एसपी कार्यालय पहुंचकर भी अपना आक्रोश व्यक्त किया है। पीड़ित परिवार ने केंद्रीय गृह मंत्री से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  1. स्वतंत्र जांच: पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ और स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाए।
  2. वैज्ञानिक जांच: घटना से जुड़े सभी संभावित साक्ष्यों को तत्काल जब्त कर उनकी साइंटिफिक जांच हो।
  3. लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई: एफआईआर में देरी और साक्ष्य संग्रह में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।
  4. सुरक्षा की गारंटी: पीड़ित बच्चियों और उनके पूरे परिवार को तत्काल पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए।
    इस मामले के सामने आने के बाद बिलासपुर पुलिस प्रशासन पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। अब देखना यह है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई इस शिकायत के बाद स्थानीय प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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