

सौरभ साहू/ राजधानी रिपोर्टर,,
दिनांक 24/05/2026,
जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़।।
सूरजपुर/जरही:– जिले के जनपद पंचायत अंतर्गत संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं। प्रतापपुर ब्लॉक के ग्राम कोरंधा सहित कई ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अधूरे पड़े प्रधानमंत्री आवासों को सरकारी रिकॉर्ड में पूर्ण दर्शाकर राशि आहरित कर ली गई है। मामले के सामने आने के बाद पंचायत स्तर से लेकर जनपद पंचायत तक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन गरीब परिवारों को सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत पक्का आवास उपलब्ध कराने का दावा किया गया था, वे आज भी अधूरे निर्माण वाले मकानों में रहने को मजबूर हैं। कई आवासों में छत अधूरी है, दीवारों में प्लास्टर नहीं हुआ है तथा दरवाजे और खिड़कियां तक नहीं लगी हैं। इसके बावजूद संबंधित आवासों को रिकॉर्ड में “पूर्ण” दिखा दिया गया है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कई मामलों में दूसरे मकानों की तस्वीर खींचकर किसी अन्य हितग्राही के अधूरे आवास को पूर्ण बताया गया और उसी आधार पर भुगतान प्रक्रिया पूरी कर ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक स्थिति और दस्तावेजों में दर्ज जानकारी में भारी अंतर दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई है। उनका आरोप है कि सरकार द्वारा जारी सहायता राशि हितग्राहियों तक पूरी पारदर्शिता के साथ नहीं पहुंच रही और बीच में ही राशि के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि उन्हें योजना से जुड़ी किस्तों और भुगतान की सही जानकारी तक नहीं दी गई।
मामले में यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि आवास पूर्ण होने के बाद मिलने वाली 90 दिनों की मजदूरी भुगतान राशि निकालने के लिए अधूरे मकानों को जल्दबाजी में “पूर्ण आवास” दर्शाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई मकानों में निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ, फिर भी रिकॉर्ड में उन्हें पूर्ण दिखाने की प्रक्रिया जारी है।
ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई पंचायतों में एक ही सचिव को तीन-तीन ग्राम पंचायतों का प्रभार दिया गया है, जिससे योजनाओं की निगरानी और संचालन प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा रोजगार सहायकों और आवास मित्रों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई गांवों में जिम्मेदार कर्मचारी नियमित रूप से नहीं पहुंचते और अधिकांश कार्य केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित होकर रह गए हैं।
सबसे गंभीर आरोप आवासों के ऑडिट और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई मामलों में ऑडिट करने पहुंचे कर्मचारी बिना हितग्राहियों के घर पहुंचे और बिना निर्माण कार्य का भौतिक निरीक्षण किए ही पूरी प्रक्रिया कागजों में पूर्ण कर देते हैं। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके नाम से फर्जी हस्ताक्षर तक कराए गए। कई हितग्राहियों का कहना है कि ऑडिट कर्मचारी उनके घर कभी पहुंचे ही नहीं, लेकिन रिकॉर्ड में उनके हस्ताक्षर दर्ज हैं और अधूरे आवासों को पूर्ण बता दिया गया।
ग्रामीणों ने जनपद पंचायत और जिला पंचायत स्तर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लगातार बैठकों और समीक्षा कार्यक्रमों के बावजूद जमीनी स्तर पर व्याप्त अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम कोरंधा सहित संबंधित पंचायतों में बने सभी प्रधानमंत्री आवासों की भौतिक जांच कराई जाए, हितग्राहियों के बयान दर्ज किए जाएं तथा दोषी कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि गरीबों के लिए संचालित योजना में यदि इसी प्रकार अनियमितताएं जारी रहीं तो जरूरतमंद परिवारों तक योजना का वास्तविक लाभ नहीं पहुंच पाएगा।
मामले में ग्राम पंचायत सचिव कमला ठाकुर का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।।
