

नौगई घटना पर जताई चिंता, कहा— अपराध रोकने में जनता का सहयोग पुलिस की सबसे बड़ी ताकत,,,,
राजधानी रिपोर्टर/सौरभ साहू की विशेष रिपोर्ट,,,,
दिनांक 05/07/2026,
लोकेशन, बैकुंठपुर जिला कोरिया छत्तीसगढ़।।
कोरिया/ बैकुंठपुर, छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम सरगुजा संभाग के दौरे के दौरान रविवार को कोरिया जिले पहुंचे। यह दौरा उनके लिए केवल प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भावनाओं से जुड़ा एक ऐसा पल भी बन गया, जब वे अपने पुलिस जीवन की पहली कर्मभूमि पर वर्षों बाद लौटे। कोरिया जिला ही वह स्थान है, जहां वर्ष 1998 में उन्हें पहली बार पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में जिम्मेदारी मिली थी। आज उसी जिले में प्रदेश के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी के रूप में लौटना उनके लिए गौरव और आत्मीयता का विशेष अवसर रहा।
पुलिस कार्यालय पहुंचने पर डीजीपी ने अधिकारियों के साथ जिले की कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, नशे के खिलाफ अभियान, सामुदायिक पुलिसिंग तथा संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान पुलिस कार्यालय में लगी पूर्व पुलिस अधीक्षकों की पदस्थापना सूची में अपना नाम सबसे ऊपर देखकर वे भावुक नजर आए। सूची में उनका कार्यकाल 25 मई 1998 से 19 जून 2000 तक दर्ज है, जो उनके सफल पुलिस जीवन की पहली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का साक्षी है।
“ कोरिया ने मुझे पुलिस सेवा की पहली सीख दी”
पत्रकारों से चर्चा करते हुए डीजीपी अरुण देव गौतम ने कहा कि कोरिया उनकी पहली पोस्टिंग रही है और इस जिले से उनका भावनात्मक रिश्ता हमेशा बना रहेगा।।
उन्होंने कहा,
“एसपी के रूप में मेरी पहली नियुक्ति कोरिया में हुई थी। काफी लंबे समय बाद यहां आने का अवसर मिला है। इस जिले की जनता, यहां के लोगों का सहयोग और यहां का अनुभव मेरे पूरे पुलिस जीवन की मजबूत नींव बना।”
नौगई घटना पर बोले— ऐसी घटनाएं कोरिया की पहचान नहीं
हाल ही में नौगई क्षेत्र में हुई घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए डीजीपी ने कहा कि कोरिया जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सामाजिक सौहार्द और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। ऐसी घटनाएं जिले की पहचान नहीं हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल पुलिस के भरोसे अपराध नियंत्रण संभव नहीं है।
समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता से ही अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
डीजीपी ने कहा,
“यदि नागरिक पुलिस का सहयोग करें, संदिग्ध गतिविधियों की समय पर जानकारी दें और सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं, तो अपराधियों के लिए कहीं भी जगह नहीं बचेगी। पुलिस और जनता की साझेदारी ही सुरक्षित समाज की सबसे बड़ी ताकत है।”
तीन दशक का अनुभव, कई अहम जिम्मेदारियां
1992 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी अरुण देव गौतम को हाल ही में छत्तीसगढ़ का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है। अपने तीन दशक से अधिक लंबे सेवा काल में उन्होंने कोरिया, सरगुजा, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव और बिलासपुर सहित कई जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया है। वे गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय, सीआईडी, मुख्यमंत्री सुरक्षा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक, भारतीय पुलिस पदक तथा संयुक्त राष्ट्र (UN) पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।
पुरानी यादों के साथ नई जिम्मेदारियों का संदेश
कोरिया पुलिस कार्यालय से सामने आई तस्वीर में डीजीपी अपनी पुरानी कर्मभूमि में पूरे आत्मविश्वास और गरिमा के साथ बैठे दिखाई दिए। उनके पीछे लगी पुलिस अधीक्षकों की सूची में सबसे ऊपर अंकित उनका नाम इस बात का प्रतीक है कि जिस अधिकारी ने अपने करियर की शुरुआत कोरिया से की थी, वही आज पूरे छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था की कमान संभाल रहा है।
डीजीपी का यह दौरा न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि पुलिस और समाज के बीच विश्वास, सहभागिता और समन्वय को मजबूत करने का संदेश भी दे गया। उनके शब्दों में स्पष्ट था कि प्रदेश में स्थायी शांति और सुरक्षित वातावरण तभी संभव है, जब पुलिस और आमजन एक-दूसरे के सहयोगी बनकर कार्य करें।
