

पुलिस को अपराधों की वैज्ञानिक जांच के लिए अत्याधुनिक फोरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उप महानिरीक्षक रजनेश सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार को फोरेंसिक वैन को फॉरेंसिक टीम, सीन ऑफ क्राइम यूनिट और क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला को सौंपा गया।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर फोरेंसिक वैन को रवाना किया। इस दौरान डमी के माध्यम से “सीन ऑफ क्राइम” तैयार कर पुलिस और एफएसएल टीम ने जांच प्रक्रिया की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि नई आपराधिक कानून व्यवस्था लागू होने के बाद सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले मामलों में एफएसएल जांच अनिवार्य होगी, जिससे अपराधों की सटीक विवेचना और न्यायालय में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकेंगे।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का उद्देश्य पीड़ितों को न्याय और आरोपियों को कठोर सजा दिलाना है। इसके लिए पुलिस विभाग को आधुनिक संसाधन और तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है।

वहीं ने कहा कि सरकार लगातार पुलिस प्रशासन को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है ताकि जनता को त्वरित न्याय मिल सके। कार्यक्रम में , , , महापौर सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

अधिकारियों ने बताया कि फोरेंसिक वैन के माध्यम से घटनास्थल पर ही प्रारंभिक परीक्षण किया जा सकेगा। खून के धब्बे, बाल, लार, गन पाउडर, बुलेट होल, आगजनी, विस्फोटक, पदचिह्न और टायर मार्क जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से संकलित कर क्षेत्रीय प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. समीर कुर्रे और रवि चंदेल ने डमी सीन ऑफ क्राइम बनाकर भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान और वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। ऑनलाइन माध्यम से उप मुख्यमंत्री और ने भी पुलिस प्रशासन को शुभकामनाएं दीं।
