

बिलासपुर रेंज में एनडीपीएस, पॉक्सो और सेशन ट्रायल मामलों की विवेचना को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को चेतना हॉल बिलासपुर में एक दिवसीय रेंज स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। प्रशिक्षण का मुख्य विषय “एनडीपीएस/पॉक्सो एक्ट एवं सेशन ट्रायल के अपराधों में दोषमुक्ति के कारण, विवेचना में त्रुटियां एवं समाधान” रहा। कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के सभी राजपत्रित अधिकारी, थाना प्रभारी और विवेचक प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
कार्यक्रम का आयोजन पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज के निर्देशन तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण में महाधिवक्ता कार्यालय, अभियोजन विभाग और न्यायिक अधिकारियों ने भी सहभागिता कर विवेचना की बारीकियों पर विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम की शुरुआत में एसएसपी रजनेश सिंह ने प्रशिक्षण की उपयोगिता बताते हुए कहा कि एनडीपीएस मामलों में मादक पदार्थों की सैंपलिंग, घटनास्थल के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, चैन ऑफ कस्टडी और तकनीकी साक्ष्यों का सही संकलन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विवेचना की छोटी-छोटी त्रुटियां गंभीर मामलों में भी आरोपियों के दोषमुक्त होने का कारण बनती हैं।
आईजी रामगोपाल गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि कई मामलों में गवाहों के मुकरने, कोर्ट में समय पर उपस्थित नहीं होने, प्रिंटेड फार्म के आधार पर औपचारिक विवेचना करने और तकनीकी कमियों के चलते आरोपी सजा से बच जाते हैं। उन्होंने विवेचना अधिकारियों को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर मजबूत जांच करने के निर्देश दिए।
प्रशिक्षण सत्र में नवम जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) ने विवेचना के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कार्रवाई का क्रमबद्ध नहीं होना, कॉल डिटेल रिकॉर्ड का सत्यापन नहीं कराना और एनालिटिकल मैप रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करना भी केस को कमजोर कर देता है।
इसके अलावा अभियोजन विभाग के अधिकारियों ने अलग-अलग विषयों पर व्याख्यान दिए। डीडीपी अभियोजन ने विवेचना चेकलिस्ट, लोक अभियोजक ने सेशन ट्रायल मामलों में दोषमुक्ति के कारणों, जबकि विशेष लोक अभियोजक और ने एनडीपीएस मामलों की विवेचना में आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी।
पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों पर विशेष लोक अभियोजक और ने चर्चा की। वहीं सहायक जिला अभियोजन अधिकारी ने किशोर न्याय बोर्ड से संबंधित मामलों में विवेचना की चुनौतियों और समाधान पर प्रकाश डाला। एडीपीओ ने नए कानूनों से संबंधित जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में उप महाधिवक्ता ने विवेचना को वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी, फॉरेंसिक किट, फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट, साइबर टीम और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से साक्ष्य संकलन मजबूत होगा और आरोपियों को सख्त सजा दिलाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के समापन पर एसएसपी रजनेश सिंह ने सभी प्रशिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण से विवेचना अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि की दर में सुधार होगा।
