
शशि मिश्रा

बिलासपुर में पीत पत्रकारिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है। बिना किसी आधार और पुष्ट जानकारी के कथित पत्रकार ने भ्रामक और छवि खराब करने वाली खबरें प्रकाशित की। आरोप है कि उसने भयादोहन के लिए ऐसा किया , जिसके बाद उसे लीगल नोटिस भेजने के अलावा थाने में एफआईआर भी दर्ज कराया गया है।

दरअसल सोनसरी, पचपेड़ी निवासी खिलावन पटेल और भाजपा नेता चंद्र प्रकाश सूर्या आपस में मित्र है। 29 अप्रैल को ग्राम पंचायत कुकुर्दीकला रेत घाट की जनसुनवाई थी। इसी दिन किसी काम से चंद्रप्रकाश सूर्या को कुछ रुपयों की आवश्यकता पड़ गई तो उन्होंने अपने मित्र खिलावन पटेल को फोन लगाकर पूछा कि क्या उसके पास रुपए है। खिलावन पटेल के पास रुपए थे तो उन्होंने चंद्र प्रकाश सूर्या को मौके पर ही बुला लिया और अपनी जेब में मौजूद रुपए निकाल कर बिना गिने उन्होंने चंद्र प्रकाश सूर्या को दे दिए। चूंकि चंद्र प्रकाश सूर्या को रुपए लौटाने थे इसलिए उन्होंने खिलावन पटेल को कहा कि वह रुपए को एक बार गिन ले जिससे रुपये लौटने के समय आपस में कोई संदेह नहीं रहे।
उनकी बात मानकर खिलावन पटेल ने रुपए गिन कर चंद्र प्रकाश सूर्या को दे दिए।

दोनों पुराने और गहरे मित्र हैं और उनके बीच आवश्यकता अनुसार रुपए का लेनदेन कोई नई बात नहीं है। रुपयों का यह लेनदेन खुले में सार्वजनिक जगह पर किया गया, जहां आसपास ढेर सारे लोग मौजूद थे। यहीं पर जनसुनवाई के कवरेज के लिए पचपेड़ी निवासी पत्रकार सूर्य प्रकाश सूर्यकांत भी मौजूद था, जिसने चुपके से रुपयों के इस लेनदेन का वीडियो बना लिया और फिर उसी दिन गलत मंशा से चंद्र प्रकाश सूर्या को फोन कर कहा कि आपका एक वीडियो मेरे पास है, जिसे मैं वायरल करूंगा।
चंद्र प्रकाश सूर्या ने उसकी इस बातों को खास महत्व नहीं दिया। इसके बाद सूर्य प्रकाश सूर्यकांत ने अपने न्यूज़ पोर्टल द फ्री voice.in में एक भ्रामक खबर प्रकाशित कर दी, जिसमें दो दोस्तों के बीच रुपए के लेनदेन को भ्रष्टाचार बताया गया।

इस पर चंद्र प्रकाश सूर्या और खिलावन पटेल दोनों ने ही बड़ी हैरानी और आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि अगर अनुचित तरीके से पैसे का लेनदेन करना होता तो वे किसी सुरक्षित और एकांत में ऐसा करते ना कि सार्वजनिक स्थान पर।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ना तो खिलावन पटेल रेत घाट के मालिक है और ना ही चंद्र प्रकाश सूर्या और ना ही उस रेत घाट से उनका कोई ताल्लुक है दोनों ही जनप्रतिनिधि है इसलिए इस तरह के भ्रामक वीडियो के आधार पर खबर प्रकाशित और प्रसारित करने से उनकी छवि धूमिल हो रही है, जिसे लेकर पहले तो सूर्य प्रकाश सूर्यकांत को लीगल नोटिस भेजा गया और फिर उसके खिलाफ पचमढ़ी थाने में एफआईआर भी दर्ज करा दी गई है।
पूरा मामला बुधवार का है जहां पचपेड़ी क्षेत्र के प्रस्तावित रेत घाट को लेकर जनसुनवाई थी। जहां दो जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि और पुराने दोस्तों के बीच पैसे के लेन देन को भ्रामक और साजिश पूर्ण तरीके से पेश कर एक पूरी कहानी गढ़ दी गई।

ग्राम कुकुर्दीकला धान उपार्जन केंद्र मैदान में आयोजित यह जनसुनवाई कुकुर्दीकला सेंड माइन के विकास सिंह के नाम से प्रस्तावित 11 हेक्टेयर क्षेत्र में रेत खनन के लिए पर्यावरण स्वीकृति हेतु रखी गई थी, जिसका ना जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि खिलावन पटेल से कोई ताल्लुक है और ना ही जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि चंद्र प्रकाश सूर्या से। दोनों तो पुराने मित्र हैं, जिनके बीच आपसी पैसों के लेनदेन को गलत उद्देश्य से वीडियो बनाकर न केवल भ्रामक खबरें प्रकाशित की गई बल्कि सच की जानकारी देने के बाद भी अन्य पोर्टल और समाचार पत्रों में भी अपने पहचान के जरिए मिथ्या जानकारी देते हुए खबरें प्रकाशित करवाई गई।
चूंकि दोनों ही संबंधित व्यक्ति राजनीति से जुड़े हुए हैं , इससे उनकी राजनीतिक छवि धूमिल हो रही है। दोस्तों के बीच पैसे के लेनदेन को भ्रष्टाचार बताया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि इस पैसे के लेनदेन से जनसुनवाई की निष्पक्षता प्रभावित करने की कोशिश हुई है, जबकि ऐसा खबर प्रकाशित करने वालों के पास इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। चंद्र प्रकाश सूर्या ने कहा कि आखिर दो दोस्तों के बीच पैसे के लेनदेन को किस आधार पर भ्रष्टाचार बताया जा रहा है ? उन्होंने कथित पत्रकार से इसकी जानकारी भी मांगी थी तो वे गोलमोल बात करने लगे। इसके बाद उन्हें लीगल नोटिस भेजा गया और एफआईआर भी दर्ज कर दिया गया है।
चंद्र प्रकाश सूर्या ने कहा है कि वे पिछले दो दशक से भी अधिक समय से क्षेत्र में सक्रिय और बेदाग राजनीति करते आ रहे हैं। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के भी वे बड़े पदाधिकारी हैं। उनकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य हैं । उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि है जिसे इस भ्रामक खबर से नुकसान पहुंचाने की कुचेष्टा हुई है, इसलिए उन्होंने मानहानि का दावा करने की बात कही है। साथ ही चंद्र प्रसाद सूर्या और खिलावन पटेल एक प्रेस कांफ्रेंस करने की भी तैयारी कर रहे हैं जिसमें स्वयं खिलावन पटेल पत्रकारों के समक्ष इस की पुष्टि करेंगे कि उन्होंने चंद्र प्रकाश सूर्या को जो रुपए दिए थे वह एक दोस्त होने के नाते दिए थे और दोनों के बीच रुपयों पैसों का लेनदेन चलता रहता है। उनका रेत घाट की जनसुनवाई से कोई ताल्लुक नहीं है और उनके खिलाफ आधारहीन खबरें प्रकाशित की गई है। और ऐसा केवल द फ्री voice.in ने ही नहीं बल्कि कई और समाचार पोर्टल ने भी अज्ञानता वश किया है, जिसके खंडन की अपेक्षा करते हुए शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की जाएगी।
चंद्र प्रकाश सूर्या और खिलावन पटेल ने इस पूरे घटनाक्रम को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि दो पक्के दोस्तों के बीच के लेनदेन को अलग रंग देने का प्रयास किया जा रहा है जबकि दोनों सार्वजनिक जगह पर पार्किंग में इस बात से अनभिज्ञ होकर पैसों का लेनदेन कर रहे थे कि आसपास मौजूद कोई इसे दूसरे नजरिए से भी देख रहा होगा। उन्होंने हैरानी जताई है कि क्या कोई सार्वजनिक जगह पर इस तरह से भ्रष्टाचार के पैसों का लेनदेन करता है। उन्होंने ऐसी मानसिकता पर भी हैरानी जताई है और कहा है कि कुछ कथित पत्रकार भया दोहन के लिए इसी तरह की पीत पत्रकारिता करते हुए पूरे पत्रकार जगत को शर्मिंदा कर रहे हैं। उन पर अंकुश जरूरी है। इसे लेकर उन्होंने प्रेस क्लब जैसे संगठनों से भी अपेक्षा की है कि वे ऐसे पत्रकारों पर नकेल कसेंगे, साथ ही वे इस मामले में कानूनी कार्यवाही करने की भी बात कह रहे हैं।
खोजी पत्रकारिता एक विधा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी भी वीडियो को बिना पुष्टि किये या फिर बगैर किसी प्रमाण के किसी का चरित्र हनन करते हुए समाचार प्रकाशित और प्रसारित कर दे । पत्रकारिता के भी अपने पैमाने होते हैं, जिसका उल्लंघन ऐसे ही कानूनी विवादों को जन्म देता है। इसलिए किसी भी खबर के प्रकाशन से पहले उसकी पुष्टि और सपोर्ट डॉक्यूमेंट की आवश्यकता होती है। अति उत्साह में किए गए कार्य से बाद में इसी तरह के कानूनी पचड़ों का सामना करना पड़ता है। इस पूरे एपिसोड में दोनों नेताओं ने कठोर कार्रवाई की ठान ली है, क्योंकि अगर वे चुप रहे तो इसे उनकी मौन सहमति मानकर उन पर लगातार आरोप लगाए जाएंगे, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि बिगड़ेगी और भविष्य में इसका राजनीतिक जीवन पर भी दुष्प्रभाव पड़ सकता है। देखना होगा कि अब इस पूरे मामले में पुलिस क्या कार्रवाई करती है और यह पूरा मामला क्या रंग लेता है।
