
शशि मिश्रा
बिलासपुर, छत्तीसगढ़। शहर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां घर से चोरी हुए करीब 80 लाख रुपये के जेवर वापस पाने के लिए एक पिता ने कानून का सहारा लेने के बजाय आपराधिक रास्ता अपनाया। आरोप है कि उसने आदतन बदमाशों को हायर कर नकली पुलिस कार्रवाई के जरिए नाबालिगों का अपहरण करवा दिया।
मामला सकरी थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने अपहरण और उगाही (एक्सटॉर्शन) का अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, उसलापुर निवासी सतीश मिश्रा के बेटे ने घर से असली जेवर चोरी कर उनकी जगह नकली जेवर रख दिए थे और असली गहनों को गिरवी रखकर पैसे उधार ले लिए थे।
इस बात का पता चलने पर सतीश मिश्रा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बजाय पूर्व में पुलिस विभाग में ड्राइवर रह चुके योगेश पांडेय उर्फ भुरु और उसके साथियों को पैसे की वसूली का जिम्मा सौंप दिया। इसके बाद आरोपियों ने खुद को क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताकर बेटे के चार नाबालिग दोस्तों को बुलाया।
बताया जा रहा है कि आरोपियों ने सभी नाबालिगों को ‘पुलिस’ लिखी गाड़ी में जबरन बैठाया और शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों, जिसमें तारबाहर थाना क्षेत्र भी शामिल है, के सामने घुमाकर उन्हें डराया-धमकाया। इस दौरान उनसे चोरी गए जेवर या उनकी रकम लौटाने का दबाव बनाया गया। दो नाबालिगों को सतीश मिश्रा द्वारा अपनी कार में जबरन बैठाकर ले जाने का भी आरोप है। बाद में सभी को नेहरू चौक के पास छोड़ दिया गया।
घटना की जानकारी मिलने पर परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने सतीश मिश्रा, योगेश उर्फ भुरु पांडे, आशीष शर्मा, प्रभात ठाकुर और विनय साहू के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है।
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी योगेश पांडेय और उसके साथी पहले भी इसी तरह खुद को क्राइम ब्रांच का आरक्षक बताकर वसूली करने के मामले में गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है।
