

रायगढ़, 24 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में साइबर अपराध के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर की जा रही ठगी का भंडाफोड़ किया है। इस प्रकरण में महिला सहित पांच अंतर्राज्यीय आरोपियों को राजस्थान के भीलवाड़ा से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाया गया है। आरोपियों ने एक सेवानिवृत्त विद्युत विभाग अधिकारी से 36.97 लाख रुपये की ठगी की थी।
पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर थाना रायगढ़ द्वारा की गई इस कार्रवाई में सामने आया कि आरोपी खुद को टेलीकॉम अधिकारी, पुलिस अधिकारी तथा सीबीआई अधिकारी बताकर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाते थे। इसके माध्यम से वे मनी लॉन्ड्रिंग और गिरफ्तारी का डर पैदा कर पीड़ितों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवाते थे।

सेवानिवृत्त अधिकारी बना शिकार
मामले के अनुसार, रायगढ़ निवासी सेवानिवृत्त विद्युत विभाग पर्यवेक्षक नरेंद्र ठाकुर को जनवरी 2026 में एक अज्ञात महिला का कॉल आया, जिसने स्वयं को टेलीकॉम नियामक संस्था से जुड़ा बताया। इसके बाद कॉल को कथित पुलिस और सीबीआई अधिकारियों से जोड़कर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी गई।
आरोपियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर विश्वास कायम किया और जांच के नाम पर बैंक खातों में राशि ट्रांसफर करने को कहा। दबाव और भय के कारण पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी के बीच कुल 36,97,117 रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का अहसास होने पर 17 फरवरी को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
तकनीकी जांच से खुला नेटवर्क
प्रकरण दर्ज होने के बाद साइबर पुलिस ने बैंक ट्रांजेक्शन, डिजिटल ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित बैंक खातों में ट्रांसफर हुआ है। इसके आधार पर विशेष टीम गठित कर वहां दबिश दी गई।
कार्रवाई के दौरान बंधन बैंक के कर्मचारी राहुल व्यास को हिरासत में लिया गया, जिसे गिरोह का मास्टरमाइंड बताया गया है। पूछताछ में उसके साथियों—रविराज सिंह, आरती राजपूत, संजय मीणा और गौरव व्यास—की संलिप्तता सामने आई। सभी आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया।
देशभर में फैला था गिरोह
जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह संगठित तरीके से देशभर में साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने इंटरनेट और वीडियो के माध्यम से ठगी के तरीके सीखे और बैंक खातों का उपयोग कर रकम का लेनदेन किया।
पुलिस के अनुसार, गिरोह द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में कुल 1.40 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। आरोपियों के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में संदिग्ध लेनदेन पाया गया, जिनमें से कुछ खातों को सीज कर दिया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंक रिकॉर्ड जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है। इसके अलावा एटीएम जमा पर्चियां और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं, जिनके आधार पर आगे की जांच जारी है। पुलिस को इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के भी सुराग मिले हैं।
जागरूकता पर जोर
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी किसी भी अवधारणा के नाम पर आने वाले कॉल से सतर्क रहें। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश नहीं देती। ऐसे मामलों में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस टीम की भूमिका
इस पूरे प्रकरण का खुलासा करने में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक के नेतृत्व में टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक ज्योत्सना शर्मा सहित साइबर स्टाफ के अन्य सदस्यों का विशेष योगदान रहा।
पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा साइबर ठगी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए जांच जारी है।
