


बिलासपुर। भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर मंगलवार को शहर में आस्था, उत्साह और सांस्कृतिक वैभव का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। समग्र ब्राह्मण समाज एवं परशु सेना के संयुक्त तत्वावधान में निकाली गई विशाल शोभायात्रा ने पूरे शहर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।
शोभायात्रा की शुरुआत दयालबंद स्थित शीतला माता मंदिर में विधिवत ध्वज पूजन के साथ हुई। इसके बाद यात्रा गांधी चौक, गोलबाजार और देवकीनंदन चौक होते हुए पंडित देवकीनंदन स्कूल परिसर पहुंचकर संपन्न हुई। लगभग एक किलोमीटर लंबी इस यात्रा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे प्रमुख मार्गों पर देर तक उत्सव का माहौल बना रहा।

यात्रा के दौरान गांधी चौक से लेकर गोलबाजार तक का क्षेत्र पंथी और कर्मा नृत्य, डीजे, धुमाल, बैंड और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से जीवंत हो उठा। उज्जैन से आए डमरू दल, बस्तर के पारंपरिक वाद्ययंत्र, पंजाब के बैंड और महाराष्ट्र के पथक ने आयोजन को विविध सांस्कृतिक रंगों से सुसज्जित किया।

शोभायात्रा में 15 फीट ऊंची भगवान परशुराम, बाहुबली हनुमान, भगवान शंकर, श्रीराम, छत्तीसगढ़ महतारी की भव्य झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। रंगीन रोशनी से सजी इन झांकियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही मां काली, विभिन्न देवियों की झांकियों और ताशे की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
विशेष रूप से छोटे-छोटे बच्चों ने भगवान परशुराम, श्रीराम, हनुमान, माता सीता और भगवान शंकर के वेश धारण कर सभी का मन मोह लिया।

यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया तथा खिचड़ी, हलवा, शरबत और कुल्फी का वितरण किया गया।

धर्मसभा में दिया एकता और संस्कार का संदेश
शोभायात्रा का समापन पंडित देवकीनंदन स्कूल परिसर में हुआ, जहां चांपा सेवा संस्थान द्वारा भगवान परशुराम की भव्य महाआरती की गई। गंगा आरती की तर्ज पर आयोजित इस महाआरती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

इसके पश्चात आयोजित धर्मसभा में जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी घनश्यामाचार्य महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि बिलासपुर में भगवान परशुराम जन्मोत्सव का आयोजन ऐतिहासिक और अत्यंत भव्य स्वरूप में हो रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम केवल शौर्य के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन में तप, त्याग और उदारता का भी विशेष महत्व रहा है।

उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज को शौर्य के साथ-साथ तप और संयम को भी आत्मसात करना चाहिए। साथ ही सनातन धर्म और सामाजिक एकता की मजबूती के लिए संगठित होकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। धर्मसभा के दौरान महिलाओं द्वारा भजन-कीर्तन भी प्रस्तुत किए गए, जिसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।
शहरभर में हुआ भव्य स्वागत

शोभायात्रा का शहर के विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया। गोलबाजार में भाजपा नेताओं द्वारा, करोना चौक में दाऊदी बोहरा समाज, नवयुवक कान्यकुब्ज विकास समिति, मध्य मनगरी दुर्गोत्सव समिति, जापान टाल परिवार, राजपूत क्षत्रिय समाज, रंगा नादम, पंकज तिवारी, वंदे मातरम मित्र मंडल, पूज्य सिंधी पंचायत, भूमिहार ब्राह्मण समाज, हिंदू पंजाबी सनातन संस्था और धर्म जागृति मंच सहित अनेक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।

यात्रा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, समाजसेवी पंडित प्रवीण झा, सीएमडी कॉलेज के चेयरमैन, डॉ. संजय दुबे, विनय शर्मा, ठाकुर रामसिंह और डॉ. विवेक बाजपेई सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
शाम लगभग 6:30 बजे प्रारंभ हुई यह शोभायात्रा रात 10 बजे के बाद अपने गंतव्य पर पहुंची। मार्ग में वेंकटेश मंदिर सहित कई स्थानों पर भगवान परशुराम की आरती की गई, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।

सामाजिक समरसता का प्रतीक बना आयोजन

यह शोभायात्रा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण का भी सशक्त संदेश देकर गई। विविध समुदायों और संगठनों की सहभागिता ने यह सिद्ध किया कि इस प्रकार के आयोजन समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
