बिलासपुर में परशुराम जयंती पर उमड़ा आस्था का सैलाब, भव्य शोभायात्रा में दिखी सामाजिक एकजुटता, आज दयालबंद से निकलेगी शोभायात्रा

बिलासपुर।
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम जयंती पूरे श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के साथ मनाई गई। इस दौरान शहर के सरकंडा क्षेत्र सहित विभिन्न इलाकों में पहली बार भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक झांकियों और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम इस आयोजन में देखने को मिला।

शोभायात्रा में झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र

राजकिशोर नगर स्थित परशुराम चौक से ध्वजा पूजन और बाइक रैली के साथ शोभायात्रा की शुरुआत हुई, जो अशोकनगर चौक पहुंचकर पदयात्रा में परिवर्तित हो गई। यहां संत शिरोमणि श्रीराम भिक्षुक दास महाराज की प्रतिमा की पूजा-अर्चना के बाद यात्रा ने भव्य रूप धारण किया।
शोभायात्रा में भगवान परशुराम की सजीव झांकी के साथ भगवान श्रीराम के विश्राम का दृश्य, समीप बैठे हनुमान जी, राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी तथा महिषासुर मर्दिनी के संहार का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इसके साथ ही पंथी नृत्य, मां काली की प्रस्तुति और लाइव रंगोली ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
ढोल-ताशों, डीजे और जयकारों के बीच युवा एवं महिलाएं पूरे उत्साह से झूमते नजर आए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

प्रमुख मार्गों से होते हुए हुआ समापन

अशोकनगर चौक से आगे बढ़ते हुए शोभायात्रा नूतन चौक पहुंची, जहां ग्राम देवता, ठाकुर देवता और स्फटिकेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद यात्रा सीपत चौक, श्रीराम सेतू चौक और अरपा नदी पुल होते हुए बाजपेयी मैदान पहुंची, जहां समापन समारोह आयोजित किया गया।
समापन अवसर पर संत समागम, धर्मसभा, प्रवचन एवं सम्मान समारोह आयोजित हुआ। पंडितों द्वारा महाआरती की गई और श्रद्धालुओं के बीच भोग-प्रसाद का वितरण किया गया। वरिष्ठजनों द्वारा ध्वज को श्रीराम मंदिर में अर्पित किया गया।

जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

यात्रा मार्ग में सरकंडा क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों एवं कॉलोनियों में श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में खड़े होकर शोभायात्रा का स्वागत किया। लस्सी, छाछ, शीतल पेय, मिठाई एवं पेयजल की व्यवस्था की गई थी।
नूतन चौक स्थित बॉडी टेंपल जिम के सामने सर्व राजपूत क्षत्रिय समाज, बिलासपुर द्वारा शोभायात्रा का विशेष स्वागत किया गया। इस दौरान ब्राह्मण समाज के वरिष्ठजनों का फूलमाला से अभिनंदन कर कुल्फी एवं पेयजल वितरित किया गया।

विभिन्न समाजों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में सर्व ब्राह्मण समाज, कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज तथा भूमिहार ब्राह्मण समाज सहित विभिन्न संगठनों की सक्रिय भागीदारी रही।

इमलीपारा स्थित भवन में पूजा-अर्चना, हवन एवं आरती के बाद भोग-प्रसाद वितरण किया गया।
ग्राम महमंद स्थित भूमिहार भवन में आयोजित कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारियों ने देश में सुख-शांति और समाज के उत्थान की कामना की। शोभायात्रा के स्वागत की जिम्मेदारी राजीव कुमार एवं सह सचिव प्रशांत सिंह को सौंपी गई।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी किया स्वागत

सेंट्रल लाइब्रेरी सरकंडा में शोभायात्रा का स्वागत कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं—बेलतरा, नगोई, बैमा, बिरकोना, उरतुम और रतनपुर सहित दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से पहुंचे ब्राह्मण समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विजय केशरवानी द्वारा शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया गया, जिसमें आतिशबाजी, मट्ठा एवं जल वितरण की व्यवस्था की गई। उन्होंने भगवान परशुराम की प्रतिमा की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया और उनके आदर्शों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।


धार्मिक संदेश और सामाजिक एकता का प्रतीक
वक्ताओं ने अपने संबोधन में भगवान परशुराम को भगवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में स्मरण करते हुए उनके जीवन से धर्म, साहस और न्याय की प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि परशुराम का चरित्र अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और धर्म की स्थापना का प्रतीक है, जो आज भी समाज को एकजुट और सशक्त बनाने की प्रेरणा देता है।

हिंदू राष्ट्र के लक्ष्य के साथ आज निकलेगी शोभा यात्रा

भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर 21 अप्रैल को शीतला माता मंदिर दयालबंद से शाम 4:30 बजे समग्र ब्राह्मण समाज एवं परशु सेना द्वारा एक और शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसका समापन पं. देवकीनंदन दीक्षित स्कूल में होगा। यहां जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी घनश्यामाचार्य महाराज का प्रवचन आयोजित किया जाएगा।

बिलासपुर में पहली बार निकली इस भव्य शोभायात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था को अभिव्यक्त किया, बल्कि विभिन्न समाजों के बीच एकता, सहयोग और सांस्कृतिक समन्वय का सशक्त संदेश भी दिया। आयोजन ने यह साबित किया कि परंपराएं जब सामूहिक सहभागिता से जुड़ती हैं, तो वे समाज को जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन जाती हैं।

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