बिलासपुर में ‘आनंद आश्रम’ की शुरुआत: अकेलेपन से जूझते बुजुर्गों के लिए सेंट्रल बेंगोली एसोसिएशन की संवेदनशील पहल

प्रवीर भट्टाचार्य

बिलासपुर। बदलते सामाजिक परिवेश में जहां बेहतर शिक्षा और रोजगार की तलाश युवाओं को महानगरों और विदेशों की ओर ले जा रही है, वहीं पीछे छूट जाते हैं वे बुजुर्ग माता-पिता, जिनके जीवन में साधनों की कमी तो नहीं, लेकिन अपनापन और साथ का अभाव गहराता जा रहा है। इसी संवेदनशील वास्तविकता को समझते हुए सेंट्रल बंगाली एसोसिएशन ने मोपका कुटीपारा में ‘आनंद आश्रम’ की स्थापना की है, जिसका शुभारंभ गुरुवार को हुआ।

यह आश्रम पारंपरिक वृद्धाश्रमों से अलग एक नई अवधारणा प्रस्तुत करता है। यहां उन बुजुर्गों के लिए आवासीय सुविधा तैयार की गई है, जो आर्थिक रूप से तो सक्षम हैं, लेकिन अकेलेपन से जूझ रहे हैं। सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त या आत्मनिर्भर वरिष्ठ नागरिक यहां एक निश्चित शुल्क पर सम्मानपूर्वक और स्नेहपूर्ण वातावरण में रह सकते हैं।

करीब 7000 वर्गफीट क्षेत्र में लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस आश्रम के लिए जमीन शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. हेमंत चटर्जी द्वारा उपलब्ध कराई गई है। उनके साथ-साथ समाज के अन्य जागरूक और संवेदनशील लोगों के सहयोग से इस सपने को साकार रूप मिला है।
आश्रम में वर्तमान में 16 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था है। इसमें पांच अटैच्ड लेट-बाथ वाले कमरे, एक डॉरमेट्री, दो विशाल हॉल, मंदिर, वाचनालय, टीवी रूम और हरे-भरे परिसर की सुविधा उपलब्ध है। यहां रहने वाले बुजुर्गों की देखभाल के लिए केयरटेकर, रसोइया, प्रबंधक और अन्य कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं, जो उनके खान-पान, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखेंगे।

सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि यहां जीवन को सक्रिय और आनंदमय बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। बुजुर्ग पठन-पाठन, धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक गतिविधियों और आपसी संवाद के माध्यम से अपने जीवन को पुनः ऊर्जा और उद्देश्य से भर सकेंगे।
आश्रम में प्रवेश के लिए ₹30,000 का पंजीयन शुल्क तथा ₹10,000 प्रतिमाह शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसमें भोजन, चिकित्सा, मनोरंजन और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. हेमंत चटर्जी ने यहां रहने वाले दो बुजुर्गों का संपूर्ण खर्च स्वयं वहन करने की घोषणा भी की है।

इस आश्रम का संचालन सेंट्रल बंगाली एसोसिएशन द्वारा किया जाएगा, जबकि सामाजिक संस्था आनंद संध इसमें सहयोगी की भूमिका निभाएगी। आश्रम में प्रवेश के इच्छुक व्यक्ति या उनके परिजन सपना जाना से 9303548287 पर संपर्क कर सकते हैं।

‘आनंद आश्रम’ केवल एक भवन नहीं, बल्कि उन संवेदनाओं का घर है, जहां अकेलेपन की जगह अपनापन, और खामोशी की जगह संवाद की गर्माहट मिलेगी। उद्घाटन के दिन ही दो बुजुर्गों द्वारा सदस्यता लेना इस पहल की सार्थकता का प्रमाण है।

विशेष बात यह भी है कि इस आश्रम के निर्माण में सेंट्रल बंगाली एसोसिएशन के 1200 से अधिक सदस्यों का योगदान रहा है, जिनमें अधिकांश सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी हैं। उन्होंने अपनी पेंशन से सहयोग कर इस सामाजिक धरोहर को आकार दिया है। साथ ही समाज के अन्य सक्षम लोगों द्वारा भी इस पुनीत कार्य में निरंतर सहयोग किया जा रहा है।

निश्चित ही ‘आनंद आश्रम’ उन बुजुर्गों के लिए एक सुकून भरा ठिकाना साबित होगा, जहां वे अपने हमउम्र साथियों के साथ जीवन के सुनहरे पलों को फिर से जी सकेंगे—सार्थक, सम्मानजनक और आनंदमय ढंग से। जिससे कि इस आश्रम का नाम यकीनन सार्थक होगा।

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