बिलासपुर में बंगाली समाज ने धूमधाम से मनाया ‘पहला वैशाख’, सांस्कृतिक संध्या में झलकी परंपरा और प्रतिभा


बिलासपुर। बंगाली समाज ने बुधवार को बांग्ला नववर्ष ‘पहला वैशाख’ बड़े उत्साह और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया। बांग्ला कैलेंडर ‘बंगाब्द’ के अनुसार वैशाख मास के प्रथम दिन को नववर्ष के रूप में मनाने की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे बंगाल ही नहीं बल्कि देशभर में बसे बंगाली समाज द्वारा पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ निभाया जाता है।
बिलासपुर में निवासरत बंगाली समाज ने भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहरा जुड़ाव दर्शाते हुए इस अवसर पर भव्य आयोजन किया। तोरवा स्थित बंग भवन में छत्तीसगढ़ बंगाली समाज द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या में गीत, संगीत, नृत्य और कविता पाठ की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।


कार्यक्रम की शुरुआत संध्या बेला में हुई, जो देर रात तक निरंतर चलता रहा। मंच पर नन्हे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने अपनी-अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। विशेष रूप से महिला प्रतिभागियों का उत्साह और आत्मविश्वास देखते ही बनता था। हर प्रस्तुति पर दर्शकों की तालियों की गूंज ने कलाकारों का मनोबल बढ़ाया।


इस आयोजन में बंगाली समाज की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक सिंह ने अपने संबोधन में बंगाली संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि वे लंबे समय से इस सांस्कृतिक परिवेश से जुड़े रहे हैं और इस आयोजन का हिस्सा बनकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं। उन्होंने सभी को बांग्ला नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए सफल आयोजन के लिए आयोजकों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।


इस अवसर पर समाज के गौरवपूर्ण व्यक्तित्वों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया गया। मंच संचालन पूर्ति धर ने कुशलता के साथ किया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।


अपनी मातृभूमि से दूर रहकर भी बंगाली समाज जिस प्रकार अपनी परंपराओं और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है, वही उसकी विशेष पहचान है। यही कारण रहा कि दर्शक संध्या से ही कार्यक्रम स्थल पर डटे रहे और हर प्रस्तुति का भरपूर आनंद लेते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।
आयोजन को सफल बनाने में समाज के पदाधिकारियों एवं सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने एक बार फिर सांस्कृतिक एकता और परंपरा के संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!