
प्रवीर भट्टाचार्य

बिलासपुर में बुजुर्गों के लिए एक बड़ी सौगात के रूप में सेंट्रल बंगाली एसोसिएशन द्वारा निर्मित आधुनिक वृद्धाश्रम “आनंदो निकेतन” (आनंद आश्रम) का लोकार्पण 16 अप्रैल 2026, गुरुवार को प्रातः 11 बजे किया जाएगा। मोपका स्थित इस आश्रम के शुरू होने से शहर के उन वरिष्ठ नागरिकों को राहत मिलेगी, जो बदलते सामाजिक परिवेश में अकेलेपन का सामना कर रहे हैं।
संस्था के अध्यक्ष बी.सी. गोलदार ने बताया कि यह प्रकल्प लंबे समय से प्रतीक्षित था और इसे साकार करने के लिए एसोसिएशन के सदस्यों ने पिछले कई वर्षों से लगातार प्रयास किया। तीन वर्ष पूर्व इस भवन का शुभारंभ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस गौतम भादुड़ी के करकमलों से हुआ था और अब इसे पूर्ण रूप से संचालन के लिए तैयार कर लिया गया है।
समाज सेवा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
सेंट्रल बंगाली एसोसिएशन पिछले 15 वर्षों से शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है। इसी कड़ी में यह वृद्धाश्रम एक नई पहल है, जिसे संस्था और ज्येष्ठ नागरिक संघ के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जाएगा। पदाधिकारियों के अनुसार, समाज के विभिन्न वर्गों—चिकित्सकों, इंजीनियरों, व्यापारियों और आम नागरिकों—के सहयोग से यह प्रकल्प साकार हो सका है।
2 करोड़ की लागत से बना आधुनिक आश्रम
मोपका के कुटीपारा रोड स्थित लगभग 7 हजार वर्गफुट भूमि पर बने इस आश्रम का निर्माण करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। यह भूमि शहर के प्रतिष्ठित अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत चटर्जी द्वारा दान में दी गई है। आश्रम परिसर में शिव मंदिर, उद्यान और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे यहां रहने वाले बुजुर्गों को शांत और सुकूनभरा वातावरण मिल सके।
रहने-खाने से लेकर देखरेख तक पूरी व्यवस्था
वर्तमान में आश्रम में 16 वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास, भोजन और देखरेख की व्यवस्था की गई है, जिसे आने वाले महीनों में बढ़ाकर लगभग 40 लोगों तक किया जाएगा। यहां अटैच लैट-बाथ वाले कमरे, सामान्य कमरे, दो बड़े हॉल सहित सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। आश्रम के संचालन के लिए केयर टेकर, रसोइया और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाएगी।
योग, धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां
ज्येष्ठ नागरिक संघ के अरविंद दीक्षित के अनुसार, आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के लिए प्रतिदिन योग, धार्मिक कार्यक्रम और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिससे वे सक्रिय और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें।
पंजीयन शुरू, सहयोग का आह्वान
आनंद आश्रम में रहने के इच्छुक बुजुर्गों के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संस्था ने समाज के लोगों से भी इस सेवा कार्य में सहयोग करने की अपील की है। एसोसिएशन के अधिकांश सदस्य शासकीय सेवाओं से सेवानिवृत्त हैं और अपनी पेंशन से इस प्रकल्प में योगदान दे रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं भी तैयार
संस्था को मोपका धान मंडी के पास 5 हजार वर्गफुट भूमि शासन से भी प्राप्त हुई है, जहां भविष्य में सांस्कृतिक भवन का निर्माण किया जाएगा। यहां युवक-युवती परिचय सम्मेलन, सामूहिक विवाह और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
कुल मिलाकर, “आनंदो निकेतन” केवल एक वृद्धाश्रम नहीं, बल्कि बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और अपनापन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल के रूप में सामने आया है।
