भिंडी की बंपर पैदावार बनी किसानों के लिए संकट, मंडी में 10-12 रुपए तो पटना में 70 रुपए किलो तक बिक्री


बिलासपुर जिले में इस बार भिंडी की बंपर पैदावार किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। तिफरा थोक सब्जी मंडी में रोजाना करीब 50 टन भिंडी पहुंच रही है, लेकिन स्थानीय मांग कम होने के कारण इसके दाम गिरकर मात्र 10 से 12 रुपए प्रति किलो तक आ गए हैं। ऐसे में किसान मजबूरी में औने-पौने दाम पर फसल बेच रहे हैं।
विडंबना यह है कि यही भिंडी जब बिहार और उत्तर प्रदेश के शहरों, खासकर पटना पहुंचती है, तो खुदरा बाजार में 60 से 70 रुपए किलो तक बिक रही है। जबकि स्थानीय खुदरा बाजार में भी भिंडी 30 से 35 रुपए किलो में बेची जा रही है। इससे किसानों और उपभोक्ताओं के बीच कीमतों का बड़ा अंतर साफ दिखाई दे रहा है।
व्यापारियों को मुनाफा, किसान घाटे में
जानकारी के अनुसार, मंडी से करीब 14 रुपए किलो में खरीदी गई भिंडी पटना तक पहुंचते-पहुंचते परिवहन, हमाली और टोल समेत कुल लागत 22 से 24 रुपए प्रति किलो हो जाती है। इसके बाद थोक बाजार में इसे करीब 40 रुपए किलो बेचा जाता है, जहां व्यापारियों को प्रति किलो लगभग 15 रुपए का मुनाफा होता है। खुदरा स्तर पर यही भिंडी 60-70 रुपए किलो बिकती है, जहां दुकानदार 20 से 30 रुपए प्रति किलो तक कमा रहे हैं।
लागत भी नहीं निकल पा रही
किसानों का कहना है कि एक एकड़ में भिंडी की खेती पर करीब 50 हजार रुपए की लागत आती है। इसके अलावा मंडी में 10 प्रतिशत कमीशन और हमाली का खर्च अलग से देना पड़ता है। ऐसे में मौजूदा कीमतों पर लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
भंडारण और परिवहन की बड़ी समस्या
जिले में लगभग 2.5 लाख टन भंडारण क्षमता केवल आलू के लिए उपलब्ध है, जबकि हरी सब्जियों के लिए चिलिंग सेंटर की व्यवस्था नहीं है। रेल सुविधा होने के बावजूद खराब होने के डर से इसका उपयोग नहीं हो पाता। इससे किसानों को तुरंत फसल बेचने की मजबूरी रहती है।
सप्लाई रुकी तो और गिरेंगे दाम
तिफरा मंडी व्यापारी संघ के सचिव रामकुमार साहू के अनुसार, रोजाना करीब 40 टन भिंडी बाहर भेजी जा रही है। यदि यह सप्लाई बंद हो जाए, तो कीमतें थोक बाजार में 2 रुपए किलो तक गिर सकती हैं।
ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ा रही महंगाई
हरित सब्जी संगठन पटना के अध्यक्ष मनोज कुमार मेहता के मुताबिक, वापसी में ट्रक खाली आने के कारण दोतरफा भाड़ा वसूला जाता है। यदि लौटते समय लोड मिल जाए तो परिवहन लागत 40 से 50 प्रतिशत तक घट सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है।
उत्पादन में प्रदेश की अहम हिस्सेदारी
छत्तीसगढ़ भिंडी उत्पादन में देश में आठवें स्थान पर है। राज्य के कुल 3.83 लाख टन उत्पादन में बिलासपुर की हिस्सेदारी 6.7 प्रतिशत है, जबकि मुंगेली और जीपीएम को मिलाकर यह आंकड़ा दोगुना हो जाता है। इसके बावजूद किसानों के पास अपना कोई मजबूत एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) नहीं है।
कुल मिलाकर, उत्पादन अधिक होने के बावजूद उचित प्रबंधन और संरचना के अभाव में किसान घाटे में हैं, जबकि बिचौलिये और व्यापारी इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं।

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