

दूषित पानी पीने से ग्रामीणों को कई बीमारियों और परेशानी का कर रहे सामना,,,
शासन का विकास सिर्फ कागजों में, धरातल पर बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते हुए ग्रामीण,,,
संवाददाता/सौरभ साहू
दिनांक,25/05/2026,
भैयाथान जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़।।
सूरजपुर/भैयाथान,- दिनांक 25 मई 2026 एक तरफ जहां हमारे देश में “आजादी का अमृत महोत्सव” मना रहा है और सरकार “हर घर जल” योजना के जरिए विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सूरजपुर जिले के भैयाथान ब्लॉक से ऐसी भयावह तस्वीर सामने आई है जिसने तमाम सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी है।
जनपद सदस्य प्रतिनिधि नेहा सिंह ने बताया कि भैयाथान विकासखंड के ग्राम गोविंदगढ़,बैजनाथपुर, और आमापानी में ग्रामीण आज के डिजिटल युग में भी पीने के साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि आदिवासी परिवार अपनी प्यास बुझाने के लिए ढोडही (झरिया) और तालाब का गंदा व दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गोविंदगढ़ के ग्रामीण जहां झरिया का मटमैला पानी उपयोग कर रहे हैं, वहीं बैजनाथपुर के आमापानी क्षेत्र के लोग तालाब के दूषित पानी के सहारे जिंदगी गुजार रहे हैं। भीषण गर्मी में जलस्रोत सूख चुके हैं और प्रशासनिक उपेक्षा ने ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
दूषित पानी बना जानलेवा खतरा, कभी भी फैल सकती है महामारी
स्थानीय लोगों एवं जनपद सदस्य प्रतिनिधि नेहा सिंह, ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा उपयोग किया जा रहा पानी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के दूषित पानी के सेवन से गांवों में कभी भी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।
इन बीमारियों का बढ़ा खतरा :
हैजा और कॉलरा
टायफाइड
पीलिया और हेपेटाइटिस
डायरिया (उल्टी-दस्त)
पेचिश जैसी जानलेवा बीमारियां
जनपद सदस्य प्रतिनिधि नेहा सिंह ने बताया ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में वे हर दिन यही पानी पी रहे हैं। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों और बुजुर्गों की है, जिनकी सेहत लगातार बिगड़ने लगी है।
पानी दो, नहीं तो आंदोलन होगा” — ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
जनपद सदस्य प्रतिनिधि नेहा सिंह ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा हमारे साथ लगातार अनदेखी कि जा रही हैं जिससे क्षेत्र के सभी ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। आदिवासी ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
जनपद सदस्य, प्रतिनिधि व ग्रामीणों ने साफ कहा—
“जनपद सदस्य प्रतिनिधि नेहा सिंह,व ग्रामीणों ने कहा कि सरकार सिर्फ कागजों में योजनाएं चला रही है। जमीनी हकीकत यह है कि हम गंदा पानी पीकर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।”
PHE विभाग पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग और प्रशासनिक अमला मौजूद होने के बावजूद ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा तक क्यों नहीं मिल पा रही है?
शुद्ध पानी के लिए ग्रामीणों, एवं जनपद सदस्य ने कि टेंकर कि मांग,,,
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गोविंदगढ़ बैजनाथपुर,और आमापानी,
के प्रभावित इलाकों में तत्काल टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए और स्थायी समाधान किया जाए, ताकि किसी बड़ी महामारी या जनहानि से पहले लोगों को राहत मिल सके।
लेकिन अब सवाल यह भी है कि प्रशासन जागेगा या किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार करेगा…ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा?
