
यूनुस मेमन


बिलासपुर। जिले में खाकी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कोनी थाना में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक उमेश उपाध्याय और आरक्षक उदय पाटले पर एक किसान से 2 लाख रुपये की अवैध वसूली मांगने अन्यथा गांजा तस्करी के झूठे केस में फंसाने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित देवकांत द्विवेदी ने इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से करते हुए ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंप दी है।
शिकायत के मुताबिक, 17 मार्च को गांव के एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद दोनों पुलिसकर्मियों ने देवकांत को पहले थाने बुलाया, फिर अचानक गरिमा ढाबा में मिलने को कहा। वहां पहुंचने पर उसे पुलिस वाहन में बैठाकर करीब दो घंटे तक इधर-उधर घुमाया गया।
घंटों घुमाकर बनाया दबाव, फिर मांगे पैसे
पीड़ित का आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों ने साफ कहा—“पैसे दे दो, नहीं तो तुम्हें झूठे मेमो में फंसा देंगे।” इसके बाद लोधीपारा में दोबारा मुलाकात कर सीधे 2 लाख रुपये की मांग रखी गई और दो दिन का अल्टीमेटम दिया गया।

रात में कॉल, बार-बार बुलावा… लगातार दबाव
शिकायत में यह भी कहा गया है कि देर रात फोन कर लगातार दबाव बनाया गया और अलग-अलग जगहों पर बुलाया गया। एक बार सेंदरी के पास बुलाए जाने के दौरान पीड़ित का एक्सीडेंट भी हो गया, जिससे वह घायल हो गया।
घर में घुसकर धमकी, “जिंदगी खराब कर देंगे”
सबसे गंभीर आरोप 31 मार्च की घटना को लेकर है, जब दोनों पुलिसकर्मी पीड़ित के घर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने घर में घुसकर गाली-गलौच की और कहा कि “नौकरी खत्म होने से पहले तुम्हें ऐसे केस में फंसाएंगे कि जमानत भी नहीं होगी” और घर बुलडोजर से तुड़वाने तक की धमकी दी।
ऑडियो रिकॉर्डिंग ने बढ़ाई मुश्किलें

देवकांत द्विवेदी ने अपनी शिकायत के साथ एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी है, जिसमें कथित तौर पर पुलिसकर्मियों की बातचीत दर्ज है। इस रिकॉर्डिंग के सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। इस ऑडियो में सुनाई पड़ रहा है कि कथित पुलिसकर्मी इस बात से नाराज है कि जब वे द्विवेदी के घर आए थे तो वह घर में मौजूद था लेकिन फिर भी उसने पुलिस से मुलाकात की नहीं की, इसलिए अब वे उसे सबक सिखाने की बात कह रहे हैं।
अब कार्रवाई नहीं हुई तो उठेंगे सवाल
मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई नहीं होती है, तो खाकी की छवि पर और सवाल उठना तय है।
अब पूरे मामले में नजरें पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों पर कड़ा एक्शन लिया जाता है या नहीं।
