शीतला अष्टमी पर मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भक्तों ने की मां शीतला की पूजा-अर्चना


बिलासपुर। शीतला अष्टमी के पावन पर्व पर शहर के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। विशेष रूप से श्री सिद्ध शक्तिपीठ शीतला माता मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां शीतला की विधिवत पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि तथा रोगों से मुक्ति की कामना की।
श्री सिद्ध शक्तिपीठ शीतला माता मंदिर के पुजारी गोपाल कृष्ण रामानुज दास ने बताया कि शीतला अष्टमी को ‘बासौड़ा’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्तगण देवी शीतला की आराधना के लिए एक दिन पूर्व ही अपने घरों में विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर रख लेते हैं और दूसरे दिन प्रातःकाल उठकर मां शीतला की पूजा-अर्चना करते हैं।
उन्होंने बताया कि शीतला अष्टमी के दिन भक्तजन दूध, जल, पुष्प, चावल और रोली से माता की विधिवत पूजा करते हैं तथा उन्हें प्रिय ठंडे पकवानों का भोग अर्पित करते हैं। साथ ही माता को नीम के पत्तों का चंवर भी चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि मां शीतला की पूजा-अर्चना करने से चर्म रोग, कुष्ठ रोग तथा अन्य प्रकार की बीमारियों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पुजारी गोपाल कृष्ण रामानुज दास ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शीतला एक हाथ में शीतल जल से भरा कलश और दूसरे हाथ में झाड़ू धारण करती हैं। भक्तजन माता को जल से भरा घड़ा और झाड़ू भी अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु गंभीर चर्म रोगों से मुक्ति की कामना करते हुए झाड़ू को अपने शरीर से सात बार उतारकर माता को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इससे रोगों से छुटकारा मिलता है और माता की कृपा प्राप्त होती है।
उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में फैलने वाले चिकन पॉक्स से बचाव के लिए भी मां शीतला की विशेष पूजा की जाती है। इस रोग को आम बोलचाल में छोटी माता और बड़ी माता के नाम से भी जाना जाता है।
शीतला अष्टमी के अवसर पर शहर के विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। इसी क्रम में श्री सिद्ध शक्तिपीठ शीतला माता मंदिर में भी भक्तों ने श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर विशेष भोग अर्पित किया और मां शीतला का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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