

बिलासपुर। चेक बाउंस प्रकरण से जुड़े एक मामले में सिमगा कोर्ट परिसर में आरोपियों द्वारा आत्मदाह की धमकी देने के मामले को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की हरकत अदालत को डराने की कोशिश है और न्यायिक मर्यादा के खिलाफ है।
जानकारी के अनुसार बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के सिमगा न्यायालय में चेक बाउंस से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान दो पक्षकारों ने न्यायालय परिसर में खुद को आग लगाकर आत्महत्या करने की धमकी दी थी। इस घटना की रिपोर्ट जिला अदालत, बलौदा बाजार द्वारा हाईकोर्ट को भेजी गई थी।
रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों ने निचली अदालत में लिखित रूप से खेद व्यक्त किया। वहीं मौखिक रूप से उन्होंने कहा कि वे केवल क्षमा मांग रहे हैं, माफी नहीं।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपियों के आचरण से यह प्रतीत होता है कि वे अदालत को डराने का प्रयास कर रहे हैं, जो न्यायिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अनुशासन और मर्यादा सर्वोपरि है और इसे किसी भी स्थिति में भंग नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि मामले को किसी अन्य अदालत में ट्रांसफर किया जाए, ताकि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके। साथ ही अदालत ने इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में ऐसी हरकतों से बचने की कड़ी हिदायत भी दी है।
