जंगल की बेटी के संघर्ष को शब्दों में मिली पहचान — डॉ. अलका यतींद्र यादव की पुस्तक ‘वनसुता’ का हुआ विमोचन


बिलासपुर। शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में रचनाकार डॉ. अलका यतींद्र यादव की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘वनसुता’ का गरिमामय वातावरण में विमोचन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी, राष्ट्रीय कंवर समाज की अध्यक्ष एवं समाजसेवी श्रीमती कौशल्या विष्णुदेसाय उपस्थित रहीं, जिन्होंने पुस्तक का विधिवत विमोचन किया।
समारोह में साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों एवं गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या विष्णुदेसाय ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज की संवेदनाओं का दर्पण होता है और ‘वनसुता’ जैसी कृतियां उन जीवन कथाओं को सामने लाती हैं, जो अक्सर समाज की मुख्यधारा से दूर रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक संघर्ष, आत्मविश्वास और उम्मीद की सशक्त कहानी है, जो पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने के साथ प्रेरित भी करती है।
डॉ. अलका यतींद्र यादव की यह पुस्तक कोरवा जनजाति की एक बेटी के जीवन संघर्ष, सामाजिक विषमताओं और विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने के साहस की मार्मिक कथा पर आधारित है। पुस्तक में जनजातीय समाज की संस्कृति, संवेदनाएं और जीवन की वास्तविकताओं को अत्यंत संवेदनशीलता और सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है।


लेखिका डॉ. अलका यतींद्र यादव ने अपने उद्बोधन में बताया कि ‘वनसुता’ केवल एक कहानी नहीं, बल्कि उन अनसुनी आवाज़ों को शब्द देने का प्रयास है, जो समाज के दूरस्थ अंचलों में संघर्ष करते हुए भी उम्मीद का दीप जलाए रखती हैं। उन्होंने मुख्य अतिथि एवं सभी उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में संजय यादव (पार्षद), यतींद्र यादव, मांडवी नामदेव, रवि निर्मलकर, श्रीमती पुष्पा बालवीर सिंह, श्रीमती रोहिनी कौशिक तथा श्रेया यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों का सुंदर संगम बन गया।

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