

बिलासपुर। बिलासपुर-कोटा रोड स्थित ग्राम मोहनभाठा में जंगली सूअरों के हमले में घायल किसान एवं व्यवसायी प्रदीप गुप्ता की इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हमले में उन्हें गंभीर अंदरूनी चोटें आई थीं।
प्रदीप गुप्ता शिव टॉकीज चौक पर व्यवसाय संचालित करते थे और पूर्व में केबल ऑपरेटर भी रह चुके थे। गांव में उनका करीब 80 एकड़ का कृषि फार्म है, जहां वे परिवार सहित निवास कर रहे थे। शनिवार शाम वे फार्म में चल रहे कृषि कार्यों का निरीक्षण करने निकले थे, तभी जंगली सूअरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। उनके साथ पालतू कुत्ते भी थे, लेकिन सूअरों की संख्या अधिक होने से वे खुद को नहीं बचा सके।

घायल अवस्था में वे किसी तरह घर पहुंचे। उनकी पत्नी ने बेटे अभिषेक गुप्ता को सूचना दी। लगातार उल्टियां और बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। चिकित्सकों के अनुसार हमले के दौरान गिरने से उन्हें गंभीर अंदरूनी चोटें आई थीं।
चार दिन पहले मुंशी पर भी हमला
अभिषेक गुप्ता ने बताया कि चार दिन पहले फार्म के मुंशी राजेश सोनी पर भी जंगली सूअरों ने हमला किया था, हालांकि वे किसी तरह भागकर बच निकले थे। उस दौरान एक कुत्ता घायल हो गया था। किसान शकील हुसैन ने भी बताया कि 13 फरवरी को प्रदीप गुप्ता ने उन्हें फोन कर जंगली सूअरों द्वारा फसल को नुकसान पहुंचाने की शिकायत की थी। उन्होंने सूअरों से सतर्क रहने की सलाह दी थी।
केले की फसल हटने के बाद बढ़ी आक्रामकता
अभिषेक के मुताबिक फार्म में दो साल के लिए केले की फसल लगाई गई थी, जहां जंगली सूअर छिपकर रहते थे और जड़ों को नुकसान पहुंचाते थे। जब दूसरी फसल लगाने के लिए खेत की जुताई और केले की फसल हटाने का काम शुरू हुआ तो सूअरों के छिपने की जगह खत्म हो गई। इसी दौरान वे आक्रामक हो गए और हमला कर दिया।
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
जिले में जंगली सूअरों से फसल नुकसान की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संघ की बैठकों में यह मुद्दा उठाया गया है। हाल ही में कृषि मेले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्ञापन देकर सूअरों और बंदरों से राहत दिलाने की मांग की गई थी।
दो वर्ष पूर्व बिनौरी क्षेत्र में भी जंगली सूअरों के हमले में तीन मजदूर घायल हुए थे। किसान शकील हुसैन ने वन विभाग व प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी और भरमार बंदूक का लाइसेंस भी मांगा था, लेकिन अनुमति नहीं मिली।
जानकारी के अनुसार जंगली जानवरों के हमले से मौत की स्थिति में वन विभाग द्वारा परिजनों को छह लाख रुपये तक मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है और किसानों ने वन विभाग से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की है।
