लिंगियाडीह में 113 मकान-दुकानें चिह्नित, कांग्रेसी पार्षद पर 50 डिसमिल कब्जे का आरोप


बिलासपुर। शहर के लिंगियाडीह क्षेत्र में नगर निगम की प्रस्तावित कमर्शियल कॉम्पलेक्स और गार्डन योजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। निगम द्वारा कराए गए सर्वे में नाले के पहले तक 113 मकान और दुकानों को चिन्हित किया गया है। आरोप है कि इसी जमीन पर वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल का लगभग 50 डिसमिल में फैला मकान और दुकान भी शामिल है।
अपोलो रोड से सीपत रोड तक फैला परिसर
बताया गया है कि संबंधित परिसर सामने से अपोलो रोड और पीछे सीपत रोड स्थित सुलभ कॉम्पलेक्स तक फैला है। यहां पार्षद पाटिल और उनके दो भाइयों का परिवार निवास करता है। परिसर में करीब 10 छोटे कमरे किराए पर दिए जाने तथा कुछ कच्चे मकान होने की भी चर्चा है। मकान के सामने तीन दुकानें भी संचालित हैं।
नाले के उस पार पार्षद का एक निजी स्कूल संचालित होने का भी आरोप है, जो कथित रूप से सरकारी जमीन पर है। इसकी आधिकारिक नापजोख नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्रफल 3 हजार वर्गफीट से अधिक बताया जा रहा है।


निगम का दावा—तीन बार नोटिस, दस्तावेज नहीं दिए
नगर निगम का कहना है कि पार्षद सहित अन्य कब्जाधारियों को तीन बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन न तो नोटिस स्वीकार किए गए और न ही स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है। निगम प्रशासन का कहना है कि कोर्ट के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अपर आयुक्त खजांची कुम्हार ने बताया कि इस मामले में अभी तक हाई कोर्ट से कोई स्टे नहीं मिला है। निगम ने अपना जवाब न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है, जबकि रहवासियों की ओर से जवाब के लिए समय मांगा गया है।
113 परिवारों को वैकल्पिक आवास का आश्वासन
निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 113 प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। कब्जा हटने के बाद नाले पर सड़क निर्माण की भी योजना है।
पार्षद का बयान—“सिर्फ एक मकान, किराया साबित हो तो इस्तीफा”
पार्षद दिलीप पाटिल ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि 113 मकानों में से केवल एक मकान उनका है। उन्होंने कहा कि यदि 50 डिसमिल कब्जा या किराया वसूली साबित हो जाए तो वे पार्षद पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए कहा कि वार्ड पार्षद के रूप में जनता की मांग उठाना उनका कर्तव्य है।
पट्टों के लिए चार आवेदन
जानकारी के अनुसार पार्षद ने अपने घर के लिए चार पट्टों के आवेदन किए हैं, जिनमें उनकी पत्नी अनीता पाटिल, मां यशोदा पाटिल तथा भाभी उर्मिला पाटिल और लीला पाटिल के नाम शामिल हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि लिंगियाडीह की बसाहट हटाने की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और कांग्रेस लोगों के साथ है। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने सवाल उठाया कि यदि पट्टों के लिए पहले शुल्क लिया गया था तो पट्टा क्यों नहीं दिया गया।
मेयर ने पलटवार करते हुए कहा कि लिंगियाडीह में सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर कब्जा है और पार्षद स्वयं भी सरकारी जमीन पर काबिज बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नोटिस के बाद भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, इसलिए अब कोर्ट के निर्देशानुसार कार्रवाई होगी।
लिंगियाडीह में प्रस्तावित विकास योजना और बेदखली की आशंका को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

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