यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 के विरोध में सर्व सवर्ण समाज का शक्ति प्रदर्शन, भारत बंद के बाद निकली बिलासपुर में हजारों की रैली, कलेक्टर को सौंपा राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन

नवल वर्मा


बिलासपुर। यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 के विरोध में सर्व सवर्ण समाज द्वारा 1 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया गया था। यह बंद आंशिक रूप से सफल रहा। सुबह के समय व्यापारियों ने स्वस्फूर्त रूप से बंद रखकर समर्थन जरूर जताया, लेकिन अपेक्षित जनसहभागिता नहीं दिखने से आंदोलनकारियों में कुछ निराशा भी देखने को मिली।


हालांकि, बंद के अगले ही दिन सोमवार को इस अधिनियम के विरोध में निकली विशाल रैली ने यह स्पष्ट कर दिया कि समाज के भीतर असंतोष गहरा है। देवकीनंदन चौक से कलेक्टर कार्यालय तक निकली इस रैली में हजारों की संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए, जिन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर अधिनियम को हिंदू समाज को जातियों में बांटने वाली वोट बैंक की राजनीति करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।


सभी वर्गों और दलों से मिला समर्थन
रैली की खास बात यह रही कि इसमें केवल सर्व सवर्ण समाज ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों के लोगों ने भी सहभागिता कर समर्थन जताया। आंदोलन को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन मिला।


भारतीय जनता पार्टी से मनीष अग्रवाल, मनीष शुक्ला, रोशन सिंह, शरद शुक्ला, बिंदु सिंह कछवाहा जैसे स्वर्ण नेता रैली में मौजूद रहे, वहीं कांग्रेस पार्टी से पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेई, शिवा मिश्रा, अनिल तिवारी, महेश दुबे, टाटा सहित कई वरिष्ठ नेता दिखाई दिए। इससे आंदोलन को व्यापक सामाजिक-राजनीतिक समर्थन मिलने का संदेश गया।


कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को ज्ञापन
सर्व सवर्ण समाज, बिलासपुर के नेतृत्व में ब्राम्हण समाज (कान्यकुब्ज, छत्तीसगढ़ी, सरजू पारी), अग्रवाल समाज, सिंघी समाज, गुजराती समाज, क्षत्रिय समाज, महाराष्ट्रीयन समाज, जैन समाज, कायस्थ समाज सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन, विशेषकर महिला शक्ति, रैली में शामिल हुए।


रैली के समापन पर कलेक्टर को राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
अधिनियम पर उठाए गंभीर सवाल
ज्ञापन में कहा गया कि यह अधिनियम सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण है और इससे उच्च शिक्षा में समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित होगा। समाज ने आरोप लगाया कि यह कानून योग्यता आधारित शिक्षा प्रणाली को कमजोर करेगा और सामान्य वर्ग के छात्रों के शिक्षा के अधिकार का हनन करेगा।


ज्ञापन की प्रमुख मांगें
यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
उच्च शिक्षा में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
सर्व सवर्ण समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। समाज ने सभी वर्गों से जाति-धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर इस अधिनियम के विरोध में एकजुट होने की अपील की।

बिलासपुर में सर्व सवर्ण समाज द्वारा निकाली गई यह रैली यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 के खिलाफ व्यापक असंतोष और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बनकर सामने आई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि समान शिक्षा और न्यायपूर्ण व्यवस्था की है, जिसके लिए वे हर स्तर पर संघर्ष को तैयार हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!