माघ गुप्त नवरात्रि: श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में माँ बगलामुखी का चौथे दिन त्रिपुरभैरवी रूप में पूजन अर्चन किया जाएगा

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) सरकंडा स्थित सुभाष चौक के प्रतिष्ठित श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। इस अवसर पर गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन माँ ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का पूजन, आराधना त्रिपुरभैरवी देवी के रूप में किया जाएगा, इस अवसर पर प्रतिदिन प्रातःकालीन श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक, पूजन एवं परमब्रह्म मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी का पूजन,श्रृंगार, श्री सिद्धिविनायक जी का पूजन श्रृंगार,एवं श्री महाकाली,महालक्ष्मी, महासरस्वती राजराजेश्वरी, त्रिपुरसुंदरी देवी का श्रीसूक्त षोडश मंत्र द्वारा दूधधारियाँ पूर्वक अभिषेक किया जाएगा।

पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि माँ त्रिपुर भैरवी: विनाश और सृजन की अधिष्ठात्री दस महाविद्याओं में चौथी महाविद्या के रूप में पूजित माँ त्रिपुर भैरवी शक्ति और विनाश की वह देवी हैं, जो संसार के परिवर्तन और शुद्धिकरण का प्रतीक हैं। गुप्त नवरात्रि में इनकी साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।भगवान शिव के ‘भैरव’ स्वरूप की शक्ति हैं। जहाँ भैरव विनाश के देवता हैं, वहीं भैरवी उस विनाश के बाद नए सृजन की आधारशक्ति हैं।

माँ त्रिपुर भैरवी का स्वरूप उग्र और तेजस्वी है, जो अज्ञानता और शत्रुओं को भयभीत करने वाला है,
उनका रंग उदय होते हुए सहस्रों सूर्यों के समान लाल और कांतिमान है।वे रेशमी लाल वस्त्र और मुण्डमाला धारण करती हैं। माँ के चार हाथ हैं। दो हाथों में वे माला और पुस्तक धारण करती हैं (जो ज्ञान का प्रतीक है), और अन्य दो हाथ वरद और अभय मुद्रा में रहते हैं।उनके तीन नेत्र हैं, जो पूर्ण ज्ञान और दूरदर्शिता को दर्शाते हैं।

त्रिपुर भैरवी को ‘तपस्या की देवी’ माना जाता है। वे विनाश की उस शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं जो बुराई, आलस्य और अहंकार को जलाकर भस्म कर देती है ताकि नई चेतना का उदय हो सके।

वे काल (समय) की शक्ति हैं।तंत्र शास्त्र में उन्हें ‘कुंडलिनी शक्ति’ के उस रूप में देखा जाता है जो मूलाधार चक्र से उठकर साधक के बंधनों को काटती है।

माँ त्रिपुर भैरवी की साधना से साधक को निम्नलिखित सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं-
मुकदमों, वाद-विवाद और शत्रुओं पर पूर्ण विजय प्राप्त होती है।साधक जो बोलता है, वह सत्य होने लगता है।जो स्त्रियाँ इनका पूजन करती हैं, उन्हें योग्य पति और सुखी वैवाहिक जीवन मिलता है।माँ की कृपा से मृत्यु और अनहोनी का डर समाप्त हो जाता है।

माँ त्रिपुर भैरवी केवल संहार की देवी नहीं हैं, बल्कि वे उस सत्य की देवी हैं जो बताती हैं कि परिवर्तन ही संसार का नियम है। वे पुराने को नष्ट करती हैं ताकि नया जन्म ले सके। उनकी कृपा जिस पर होती है, वह संसार के सभी मोह-बंधनों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है।

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