

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): सरकंडा स्थित सुभाष चौक के प्रतिष्ठित श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, एक वर्ष में आने वाली चार नवरात्रियों में से माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि ‘गुप्त’ होती हैं, जबकि चैत्र और शारदीय नवरात्रि ‘प्रकट’ मानी जाती हैं।वर्ष 2026 में यह महापर्व 19 जनवरी से प्रारंभ होकर 27 जनवरी तक चलेगा।गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। इस अवसर पर मां ब्रह्म शक्ति बगलामुखी देवी का पूजन श्रृंगार महाकाली देवी के रूप में किया जाएगा, इस अवसर पर प्रतिदिन प्रातःकालीन श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक, पूजन एवं परमब्रह्म मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी का पूजन,श्रृंगार, श्री सिद्धिविनायक जी का पूजन श्रृंगार,एवं श्री महाकाली,महालक्ष्मी, महासरस्वती राजराजेश्वरी, त्रिपुरसुंदरी देवी का श्रीसूक्त षोडश मंत्र द्वारा दूधधारियाँ पूर्वक अभिषेक किया जाएगा।

पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि शक्ति की अधिष्ठात्री माँ बगलामुखी (पीताम्बरा) की साधना के लिए यह नौ दिवसीय समय अत्यंत फलदायी है। दस महाविद्याओं में सर्वोपरि मानी जाने वाली माँ बगलामुखी की विशेष उपासना और महत्व
मां बगलामुखी देवी की उपासना विशेष रूप से वाद-विवाद, शास्त्रार्थ, मुकदमे में विजय प्राप्त करने के लिए, आप पर कोई आकारण अत्याचार कर रहा हो तो उसे रोकने सबक सिखाने, असाध्य रोगों से छुटकारा, बंधन मुक्त, संकट से उद्धार, उपद्रवो की शांति, ग्रह शांति, मनचाहे वर की प्राप्ति,संतान प्राप्ति,मोक्ष प्राप्ति आदि के लिए विशेष रूप से की जाती है।

जहाँ सामान्य नवरात्रि सामाजिक उत्सव का रूप होती हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति और कठिन संकल्पों की सिद्धि का काल है। इसमें गोपनीय तरीके से की गई साधना साधक में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

सभी भक्तों को इस ‘सिद्धि काल’ में दर्शन और पूजन का लाभ उठाना चाहिए। इस दौरान माँ को पीले पुष्प, पीले वस्त्र और पीली मिठाई अर्पित करने का विशेष महत्व है।
