

सिटी रिपोर्टर | बिलासपुर। स्मार्ट सिटी लिमिटेड की पहल से नगर निगम की सेवाएं अब और अधिक डिजिटल और सरल हो गई हैं। शहर में एआई आधारित स्मार्ट चैटबॉट के माध्यम से लोग सीधे नगर निगम को टैक्स जमा कर रहे हैं। इस नई व्यवस्था से नागरिकों को न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि शिकायत निवारण और अन्य सेवाएं भी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो रही हैं।
निगम द्वारा एआई आधारित एकीकृत संपत्ति एवं नागरिक सेवा प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इसके तहत प्रॉपर्टी टैक्स भुगतान, निदान शिकायत निवारण प्रणाली, भवन अनुज्ञा (बिल्डिंग परमिशन) की स्थिति की जानकारी और एआई आधारित व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से विभिन्न नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। निगम अधिकारियों के अनुसार यह प्रणाली क्यूआर कोड आधारित मॉडल की तुलना में अधिक प्रभावी, सरल और व्यापक है।
निगम अफसरों ने बताया कि जीआईएस परियोजना के तहत शहर के लिए सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, नालियां, भूमि उपयोग, जल निकाय, सार्वजनिक परिसंपत्तियां सहित लगभग 28 अलग-अलग डेटा लेयर विकसित की गई हैं। इनमें संपत्ति लेयर भी एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसके आधार पर टैक्स संग्रहण और नागरिक सेवाओं को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है।
अधिकारियों के मुताबिक पहले क्यूआर कोड आधारित टैक्स संग्रहण प्रणाली पर करीब 1.35 करोड़ रुपये की लागत आ रही थी। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान यह सामने आया कि यह सिस्टम तकनीकी रूप से सीमित, संचालन में जटिल और लंबे समय में अधिक खर्चीला है। इसी कारण इस योजना को बीच में ही बंद कर दिया गया। संबंधित एजेंसी को अब तक करीब 50 प्रतिशत राशि, यानी लगभग 67.50 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
नई चैटबॉट आधारित व्यवस्था से अब लगभग 7.5 लाख नागरिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। निगम का दावा है कि यह प्रणाली न केवल टैक्स भुगतान को आसान बनाएगी, बल्कि नागरिकों और नगर निगम के बीच संवाद को भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगी।
