बिलासपुर में आयोजित पंडित विजय कौशल महाराज के राम कथा का सोमवार को हुआ भव्य समापन, महाआरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब


बिलासपुर, 19 जनवरी।
लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का सोमवार को भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन प्रसिद्ध कथा वाचक विजय कौशल महाराज ने लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन, रामेश्वरम और प्रयागराज गमन तथा राजतिलक की भावपूर्ण कथा सुनाई। कथा श्रवण के दौरान पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।


विजय कौशल महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम धर्म के रक्षक हैं और उनका संपूर्ण जीवन धर्म की स्थापना का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि रावण वध के बाद प्रभु श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान से पहले रामेश्वरम पहुंचे, जहां भगवान शिव के दर्शन कर कृतज्ञता प्रकट की। इसके पश्चात प्रयागराज में गंगा मैया के दर्शन और पूजन किए। कथा में हनुमान जी द्वारा अयोध्या जाकर भरत को प्रभु राम के आगमन का संदेश देने और भरत के भावुक प्रसंग का भी सजीव वर्णन किया गया। अंत में प्रभु श्रीराम के अयोध्या पहुंचने और भव्य राजतिलक की कथा सुनाई गई, जिसमें समस्त देवताओं के उपस्थित होने का उल्लेख किया गया।


राम कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने विधिवत महाआरती की। इस अवसर पर आयोजन समिति के प्रमुख संरक्षक और विधायक अमर अग्रवाल ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु और संत की कृपा से ही ऐसे दिव्य आयोजनों का सुफल मिलता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में पहली बार बिलासपुर में राम कथा का आयोजन हुआ था और विजय कौशल महाराज की अनुकंपा से शहर को प्रभु श्रीराम से जोड़ने का सौभाग्य मिला।
विधायक अमर अग्रवाल ने कहा कि 12 जनवरी से प्रतिदिन राम कथा में बड़ी संख्या में माताओं-बहनों की भागीदारी देखने को मिली, जो शहर के आध्यात्मिक जागरण का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि 11 जनवरी को आयोजित कलश यात्रा में लगभग 15 हजार माताओं-बहनों ने सहभागिता की, जो अपने आप में ऐतिहासिक रही। यह यात्रा किसी रिकॉर्ड के लिए नहीं, बल्कि प्रभु राम के प्रति आस्था और भक्ति का प्रतीक थी।


उन्होंने कहा कि बिलासपुर ऐसा शहर है जहां अनुशासन और आध्यात्म के साथ बिना किसी विशेष पुलिस सुरक्षा के राम कथा का शांतिपूर्ण आयोजन हुआ। यह जनआस्था, सेवा और समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने कामना की कि बिलासपुर सदैव प्रभु राम की कृपा से आध्यात्मिक केंद्र के रूप में आगे बढ़ता रहे।
महाआरती और समापन समारोह में अमर अग्रवाल, शशि अग्रवाल, महेश अग्रवाल, बृजमोहन अग्रवाल, महापौर पूजा विधानी, अशोक विधानी, गुलशन ऋषि, विजय ताम्रकार, महेश दुबे, प्रवीण दुबे, स्नेहलता शर्मा, सुरेंद्र तिवारी, युगल शमा, नारायण तिवारी, राजेंद्र भंडारी, मुरली वाजपेई, आंचल दुबे, श्याम साहू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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