

बिलासपुर। सिम्स अस्पताल में अब मरीजों की जांच और इलाज से जुड़ी पूरी मेडिकल हिस्ट्री डिजिटल रूप से सुरक्षित रखी जाएगी। अस्पताल प्रबंधन ने ब्लड रिपोर्ट को क्यूआर कोड और यूनिक आईडी से जोड़ते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक स्वरूप दे दिया है। नई व्यवस्था के तहत मरीज की ब्लड रिपोर्ट में क्यूआर कोड दिया जाएगा, जिसे स्कैन करते ही पूरी रिपोर्ट स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगी।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार अब मरीजों को कागजी रिपोर्ट संभालकर रखने की जरूरत नहीं होगी। उनकी जांच संबंधी सभी जानकारी अस्पताल के डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेगी, जिसे मरीज अपनी यूनिक आईडी के माध्यम से कभी भी देख सकेंगे। इससे पुरानी जांच और इलाज का विवरण प्राप्त करना आसान हो जाएगा।
मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सिम्स के बायोकेमिस्ट्री विभाग में सीएसआर मद से 60 लाख रुपए की लागत से अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं। इनमें फुल ऑटोमैटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर और हाई परफॉरमेंस लिक्विड क्रोमेटोग्राफी (एचपीएलसी) एनालाईजर शामिल हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष साहू ने बताया कि जिला कलेक्टर के प्रयासों से लंबे समय बाद इन आधुनिक मशीनों की स्थापना संभव हो सकी है।
डॉ. साहू के अनुसार पहले एक जांच में लगभग 20 मिनट तक का समय लगता था, जबकि नई मशीनों के माध्यम से अब रिपोर्ट महज 5 से 7 मिनट में तैयार हो रही है। इससे जांच प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी आई है। बीते वर्ष सिम्स के बायोकेमिस्ट्री विभाग ने एक साल में करीब साढ़े 12 लाख ब्लड टेस्ट कर रिकॉर्ड बनाया, जो प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में सर्वाधिक है।
सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य मरीजों को बेहतर, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अत्याधुनिक मशीनों से जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होगा, जिससे उपचार प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनेगी।
वहीं, एमएस डॉ. लखन सिंह ने कहा कि मरीजों को समय पर सही रिपोर्ट उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। जांच प्रक्रिया को सरल, तेज और पूर्णतः कंप्यूटरीकृत बनाकर मरीजों को बेहतर सुविधा देना ही अस्पताल का मुख्य लक्ष्य है।
नई डिजिटल व्यवस्था से सिम्स में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ ही मरीजों को पारदर्शी और भरोसेमंद सुविधा मिल सकेगी।
