बिलासपुर के बुधवारी बाजार पर संकट , निर्माण से 7 दिन पहले दुकानदारों को देना होगा नोटिस, विकास के लिए खाली करनी होंगी बुधवारी बाजार की दुकानें


बिलासपुर। रेलवे स्टेशन के कायाकल्प और अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत प्रस्तावित सौंदर्याकरण कार्य को लेकर बुधवारी बाजार की दुकानों से जुड़ी कानूनी अड़चनें अब समाप्त हो गई हैं। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रेलवे की जमीन पर काबिज दुकानदारों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के पास वैध लीज नहीं है, इसलिए उन्हें जमीन खाली करनी होगी। हालांकि, कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया है कि निर्माण कार्य शुरू करने से ठीक 7 दिन पहले दुकानदारों को अंतिम नोटिस दिया जाए।
बुधवारी बाजार में वर्षों से व्यापार कर रहे कमल कुमार बजाज, दूला राम वाधवानी, सीताराम जुनेजा, यश अजमानी सहित 14 अन्य दुकानदारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि वे पिछले 50 से 60 वर्षों से यहां कारोबार कर रहे हैं। उनका कहना था कि रेलवे ने वर्ष 2010 में उनकी लीज पांच साल के लिए बढ़ाई थी, लेकिन 2015 में लीज समाप्त होने के बाद नवीनीकरण के लिए किए गए आवेदनों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। दुकानदारों ने रेलवे पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए यह भी कहा था कि उन्हें हटाया जा रहा है, जबकि एक बड़े ब्रांड हल्दीराम को दुकान आवंटित की गई है।
ई-नीलामी में शामिल नहीं हुए व्यापारी
रेलवे की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में सभी याचिकाकर्ता अनधिकृत कब्जाधारी की श्रेणी में आते हैं। हल्दीराम को दुकान दिए जाने के आरोप पर रेलवे ने हलफनामा पेश कर स्पष्ट किया कि कोच रेस्टोरेंट के लिए ओपन ई-नीलामी की गई थी, जिसमें इन दुकानदारों ने भाग ही नहीं लिया। रेलवे ने यह भी बताया कि वाणिज्यिक विभाग के पास दुकान टूटने के बदले पुनर्वास की कोई मौजूदा नीति नहीं है।
करीब 3 करोड़ रुपये बकाया
हाई कोर्ट को यह भी बताया गया कि बुधवारी बाजार के कई दुकानदारों पर लाइसेंस शुल्क के रूप में लाखों रुपये बकाया हैं। अक्टूबर 2024 की स्थिति में कुल बकाया राशि लगभग 3 करोड़ रुपये है। कुछ दुकानदारों पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया भी बताया गया है। प्रमुख बकायेदारों में मुल्कराज होटल, डॉली ड्रेसेस, सोना स्वीट्स, अजंता होटल, एलोरा होटल, मारवाड़ी होटल, लक्ष्मी वैष्णव भोजनालय सहित अन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं।
हाई कोर्ट ने रेलवे से यह भी पूछा कि निर्माण कार्य कब शुरू होना है, जिस पर रेलवे ने बताया कि लगभग 45 दिनों में निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाना है। इसके बाद कोर्ट ने पूर्व में दिए गए यथास्थिति के अंतरिम आदेश को संशोधित करते हुए कहा कि जब रेलवे को निर्माण के लिए जमीन की वास्तविक आवश्यकता होगी, तब 7 दिन का नोटिस देकर दुकानों को हटाया जा सकेगा।
इस फैसले के बाद अब रेलवे स्टेशन के विकास और सौंदर्याकरण का रास्ता साफ हो गया है, वहीं बुधवारी बाजार के दुकानदारों को अपनी दुकानें खाली करने की तैयारी करनी होगी।

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