सवर्णो को मोदी जी का एक और नायाब तोहफा या फिर भाजपा का मास्टर स्ट्रोक ?

आज सवर्ण जगत यह सवाल पूछ रहा है कि मोदी जी इस कानून को बनाने में आपकी क्या विवशता है..
या वाकई सामान्य दर्जे के लोग आपके वोट बैंक का हिस्सा नहीं है…..आपकी ये नीतियां वाकई ये दर्शा रही है कि कल को यदि किसी और की सरकार आ गई तो देश को बर्बाद होने से कोई रोक नहीं सकता…..

आरक्षण सिर्फ सामाजिक खाई उत्पन्न कर सकती है…और सवर्णों का भाजपा सरकार पर विश्वास मत घटेगा….
लेकिन ये भी सत्य है कि जिसका कोई नहीं उसके महादेव है…यदि जल्द इन परिवर्तनों को बदला नहीं गया तो इसका खामियाजा बीजेपी को लोकसभा और राज्यसभा में भरना पड़ेगा….बाकी सवर्ण तो बना ही है झेलने के लिए.

  • कल यूजीसी ने देश के अंदर प्रमोशन ऑफ इक्वेलिटी इन हाइयर एजुकेशन रेगुलेशन 2026 लागू कर दिया है । इस कानून के तहत एससी एसटी और ओबीसी वर्ग (मुस्लिम जातियां भी इन वर्गों में दर्ज हैं) को पीड़ित मानकर संरक्षित कर दिया गया है और जनरल कास्ट (कथित सवर्णों) को उत्पीड़क वर्ग की तरह परिभाषित किया गया है ।
  • ये कानून इसलिए लाया गया है ताकी यूनिवर्सिटी में किसी भी एससी, एसटी और ओबीसी छात्र को जाति सूचक गाली दी जाती है या उनके साथ प्रतिकूल व्यवहार होता है या मानवीय गरिमा के खिलाफ व्यवहार होता है तो सवर्ण छात्र के खिलाफ ये कानून लागू हो जएगा और उसको सजा मिलेगी ।
  • SC-ST एक्ट इस ताजा एक्ट से 3 मायनों में अलग है… पहला.. SC-ST एक्ट में ओबीसी शामिल नहीं हैं लेकिन इसमें ओबीसी को भी शामिल किया गया है… दूसरा… ताजा एक्ट में एक इक्वेटी स्क्वैड का गठन किया गया है यानी ये एक विशेष टीम होगी जो विश्वविद्यालयों में घूम घूम कर देखती रहेगी कि कहीं सवर्ण उत्पीड़न तो नहीं कर रहा है । ये SC-ST एक्ट में शामिल नहीं था तीसरा… SC-ST एक्ट में अपराध की परिभाषा जाति सूचक गाली तक सीमित थी जबकि ताजा एक्ट में प्रतिकूल व्यवहार या मानवीय गरिमा शब्द जोड़कर सवर्णों के खिलाफ असीमित अधिकार दे दिए गए हैं ।
  • पहले 2012 में ऐसा ही कानून यूपीए ने बनाया था लेकिन तब इसमें ओबीसी शामिल नहीं थे और गलत शिकायत होने पर शिकायत कर्ता के खिलाफ दंड का प्रावधान था । केंद्र सरकार ने इसमें ओबीसी को शामिल कर और शिकायत कर्ता को दंड का प्रावधान हटाकर इस कानून को सवर्णों के खिलाफ एक नंगी तलवार बना दिया है ।

-अब इसका दुरुपयोग इस तरह होगा मानिए कि कोई सवर्ण छात्र जो मेधावी है उसके खिलाफ झूठा मुकदमा हो सकता है ताकी उसे पढ़ाई से डीरेल कर दिया जाए । मान लीजिए किसी सवर्ण छात्र ने किसी अन्य को अपने नोट्स देने से मना किया तो भी विवाद का रूप देकर ये मुकदमा दायर हो सकता है । मानिए धुरंधर फिल्म पर बहस हुई और किसी ओबीसी मुस्लिम को बुरा लग गया तो वो भी सवर्ण छात्र पर विवाद का रूप देकर मुकदमा दायर कर सकता है । मान लीजिए किसी प्रोफेसर ने ओबीसी छात्र को प्रैक्टिकल में कम नंबर दिए तो उस पर भी ये कानून विवाद का रूप देकर लागू हो जाएगा ।

-इस तरह सवर्णों के मुंह पर कोई थूके भी । ये नारे भी लगाए कि ब्राह्मण यूरेशिया जाओ तो भी वो विरोध नहीं कर पाएगा क्योंकि उसको ताजा कानून का डर रहेगा । ये तो बहुत सारांश में लिखा है पूरे कानून में कई और भी हत्यारे प्रावधान है ।

वाह! इस मास्टरस्ट्रोक के लिए बहुत धन्यवाद आपका मोदी जी ।

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