

बिलासपुर।
शहर में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन राजस्व विभाग द्वारा समय पर सीमांकन नहीं किए जाने से नगर निगम की फाइलें अटकी हुई हैं। अफसरों की ढीली कार्यप्रणाली और विभागों के बीच समन्वय की कमी का फायदा रसूखदार उठा रहे हैं। कई जगह निगम की प्रारंभिक जांच में अवैध कब्जे चिह्नित हो चुके हैं, इसके बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
पटवारी प्रशिक्षण केंद्र के पीछे स्थित सरकारी जमीन पर निगम द्वारा पौधारोपण किए जाने के बावजूद रसूखदारों ने बाहर से बाउंड्रीवॉल खड़ी कर कब्जा कर लिया। निगम की प्रारंभिक जांच में यहां 20 से अधिक लोगों द्वारा कब्जा सामने आया है। इनमें हितेंद्र सिंह, मुशर्रफ खान, देव कुमार वर्मा और खंडेलवाल सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। इन लोगों ने सरकारी जमीन पर बाउंड्रीवॉल, गैरेज और अवैध प्लॉटिंग कर ली है। इसी क्षेत्र में सब स्टेशन के पास अनिल राठौर द्वारा चार दुकानों का निर्माण किया गया है, जो निगम सीमा में आने के बाद पूरी तरह अवैध माना जा रहा है।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कब्जे हटाने के लिए राजस्व विभाग को कई बार सीमांकन के लिए पत्र लिखा गया है, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद सीमांकन नहीं हो सका। नतीजतन निगम कार्यालय में फाइलें धूल फांक रही हैं और कब्जाधारियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस स्थिति को लेकर आरोप लग रहे हैं कि कब्जाधारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
नजूल की जमीन पर कब्जा, सड़क तक कर दी गई संकरी
अवैध कब्जे का दूसरा बड़ा मामला शिव टॉकीज चौक से पुराने बस स्टैंड के बीच स्थित जगन्नाथ मंगलम परिसर का है। यहां संचालक द्वारा शासकीय नजूल भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार पहले यहां 40 फीट चौड़ी सड़क थी, लेकिन संचालक ने सड़क के लगभग आधे हिस्से पर कब्जा कर वहां किचन का निर्माण कर दिया। इससे यातायात प्रभावित हो रहा है और आसपास के रहवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निगम प्रशासन ने अवैध निर्माण हटाने की मांग पर नोटिस जारी किया था, लेकिन सीमांकन नहीं होने से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
व्यापार विहार में जमीन का पेंच, खरीदार परेशान
तीसरा मामला व्यापार विहार क्षेत्र का है, जहां रेलवे और नगर निगम के बीच जमीन को लेकर विवाद बना हुआ है। सीमांकन स्पष्ट नहीं होने से यह तय नहीं हो पा रहा कि जमीन किस विभाग की है। इसका खामियाजा वहां प्लॉट या मकान खरीदने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोग न तो निर्माण कर पा रहे हैं और न ही अपने निवेश को लेकर आश्वस्त हैं।
नोटिस के बाद भी कार्रवाई अधूरी
भवन अधिकारी अनुपम तिवारी ने बताया कि जगन्नाथ मंगलम के संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर सीमांकन के लिए तहसीलदार को पत्र लिखा गया है। वहीं, मेयर पूजा विधानी ने कहा कि पटवारी प्रशिक्षण केंद्र के पीछे पंचायत काल से सरकारी जमीन पर कब्जा है। यहां अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई की गई है और जल्द ही कब्जे भी हटाए जाएंगे।
कागजों तक सीमित निगम की कार्रवाई
आंकड़ों के अनुसार, बीते तीन महीनों में निगम की भवन शाखा ने अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर 300 से अधिक नोटिस जारी किए, लेकिन वास्तविक कार्रवाई केवल 35 मामलों में ही हो सकी, जो कुल नोटिस का महज 12 प्रतिशत है। शहर के सभी जोनों में अवैध निर्माण तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन समय पर न तो सूची तैयार की गई और न ही ठोस पहल हुई। शिकायत मिलने पर नोटिस जारी कर निगम अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, जबकि अंतिम कार्रवाई के समय अधिकारी पीछे हटते नजर आ रहे हैं।
शहरवासियों का कहना है कि यदि सीमांकन की प्रक्रिया जल्द पूरी नहीं की गई और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और भी बढ़ते
