बिलासपुर में पंडित विजय कौशल महाराज द्वारा रामकथा का भव्य शुभारंभ, भक्ति और श्रद्धा में डूबा शहर

प्रवीर भट्टाचार्य

बिलासपुर। माघ मास की पावन बेला में बिलासपुर की धरती सोमवार को आध्यात्मिक चेतना से आलोकित हो उठी। लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर में सजे भव्य पंडाल में देश के प्रतिष्ठित संत एवं सुप्रसिद्ध रामकथा वाचक विजय कौशल महाराज के श्रीमुख से जैसे ही श्रीरामकथा का शुभारंभ हुआ, पूरा वातावरण भक्ति, भाव और श्रद्धा के सागर में डूब गया। “जय श्रीराम” के जयघोष से पंडाल गूंज उठा और हजारों श्रद्धालु कथा रस में डूब गए।

व्यास पीठ से महाराज ने कहा कि माघ मास भगवान की कथा श्रवण और पूजन का सर्वोत्तम समय है। उन्होंने प्रयागराज की परंपरा का स्मरण कराते हुए कहा कि जैसे गंगा तट पर साधु-संत और गृहस्थ मोक्ष की कामना से कथा में लीन होते हैं, वैसे ही यह रामकथा स्वयं चलकर बिलासपुर आई है। रामकथा को गंगा के समान मोक्षदायिनी बताते हुए उन्होंने कहा कि कथा श्रवण मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल, अटल और सुनिश्चित मार्ग है।

विजय कौशल महाराज ने कहा कि जहां भी भगवान की कथा होती है, वहां सभी तीर्थ स्वतः निवास करते हैं और स्वयं भगवान विराजमान रहते हैं। उन्होंने भगवान के वचनों का स्मरण कराते हुए कहा कि जहां भक्त प्रेम से कथा सुनते हैं, वहां प्रभु स्वयं उपस्थित रहते हैं। इस संदेश के साथ श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया।
महाराज ने जीवन में रामकथा को स्थान देने का आग्रह करते हुए कहा कि कथा श्रवण में ही भगवान के दर्शन का फल समाहित है। योग, यज्ञ, जप और तप से भगवान को वश में नहीं किया जा सकता, लेकिन कथा का प्रेम भगवान को भी बांध लेता है।

माता पार्वती और भगवान शंकर के संवाद का मार्मिक वर्णन करते हुए उन्होंने निर्गुण और सगुण के दार्शनिक प्रश्नों को सहज भाषा में समझाया। महाराज ने कहा कि भगवान न केवल निर्गुण हैं और न ही केवल सगुण, बल्कि वे भक्त की भावना के अनुरूप प्रकट होते हैं। पाखंड और मूर्ति-विरोधी मानसिकता से दूर रहने की सीख देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान खोजने से नहीं, पुकारने से मिलते हैं। द्रौपदी चीरहरण का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जब संसार साथ छोड़ देता है, तब भगवान भक्त की पुकार पर दौड़े चले आते हैं।
सामाजिक और नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए महाराज ने कहा कि धन का मद मनुष्य को अंधा और पद का अहंकार उसे बहरा बना देता है। सुमधुर भजनों, रामचरितमानस की चौपाइयों और रोचक दृष्टांतों के माध्यम से कथा का ऐसा प्रवाह बना कि श्रोता कभी भाव-विभोर होकर हँसे, कभी अश्रुपूरित हुए और कभी मौन साधना में डूब गए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में विजय कौशल महाराज का भव्य स्वागत मुख्य संरक्षक अमर अग्रवाल, शशि अग्रवाल, सजन अग्रवाल, अध्यक्ष महेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष मोतीलाल सुलतानिया, संयोजक गुलशन ऋषि, रजनी गुलशन ऋषि, किशन बुधिया सहित विभिन्न समाजों—सूर्यवंशी समाज, खंडेलवाल समाज, खटीक समाज, कन्नौजे रजक समाज, बैसवारा रजक समाज, स्वर्णकार समाज, चंद्रपुरिहा कसौंधन वैश्य समाज, राजपूत क्षत्रिय महासभा एवं नवयुवक कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज—के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया।

आरती एवं समापन अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, विधायक सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी, बृजमोहन अग्रवाल, सुनील गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। यह श्रीरामकथा 19 जनवरी तक प्रतिदिन आयोजित होगी। समिति ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बिलासपुर को आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सद्भाव और आत्मिक ऊर्जा से जोड़ने वाला ऐतिहासिक महायज्ञ सिद्ध होगा।

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