

ऋषिकेश। शहर में बेहद कम दामों पर रजाई, गद्दे और कंबल बेचकर चर्चा में आई एक दुकान को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, दुकान संचालक हामिद और सलमान ने बाजार से काफी कम कीमत पर सामान बेचकर ग्राहकों की भीड़ जुटाई थी। बताया गया कि जो रजाई हजार रुपये में बिकती थी, वह 400–500 रुपये में और जिसकी लागत करीब 2000 रुपये बताई जाती थी, वह लगभग 1000 रुपये में बेची जा रही थी। स्थानीय हिंदुओं ने यह पता नहीं किया कि इसके पीछे की वजह क्या है और वे सस्ते सामान पर टूट पड़े। इस कारण हामिद और सलमान का कारोबार चल निकला।

इधर कम कीमतों के कारण बाजार के अन्य व्यापारी असहज थे और उन्हें संदेह हुआ कि इतनी सस्ती बिक्री संभव कैसे है। इसी बीच, कुछ स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर निजी जांच कर वीडियो साक्ष्य जुटाना आरंभ किया। फिर जब सच्चाई पता चली तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। असल मे यह लोग पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरिद्वार क्षेत्र के श्मशान घाटों से मृतकों के छोड़े गए रजाई–गद्दे और कंबल एक नेटवर्क के जरिए एकत्र करते थे। इन वस्तुओं से रूई निकालकर साफ-सफाई व प्रोसेसिंग के बाद नई रजाइयों में उपयोग किया जाता था, जबकि कंबलों को धुलवाकर, प्रेस कर पैक करके दोबारा बेचा जाता था।

दावों के सामने आने के बाद दुकान पर हंगामा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सलमान दुकान बंद कर फरार हो गया, जिसके बाद दुकान पर ताला लगा दिया गया। पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी और धार्मिक भावनाओं को आहत करने से जुड़े प्रावधानों के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
उधर, सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं के बीच कुछ ग्राहकों ने मान्यताओं का हवाला देते हुए खरीदे गए रजाई–गद्दे और कंबल जलाकर नष्ट करने की बात कही है।
कहते हैं हर चमकने वाला चीज सोना नहीं होता। बाजार में आधी कीमत पर गद्दे और कंबल मिलने से बिना सोचे समझे ग्राहक हामिद और सलमान की दुकान पर जुटने लगे ,जिनमें से अधिकांश हिंदू ही थे, जिनकी मान्यताओं में शमशान घाट में छोड़ी गई मृतकों की वस्तुओं का इस्तेमाल करना वर्जित है, उनकी इन भावनाओं को चोट पहुंचाते हुए हामिद और सलमान ने जो साजिश की है उससे जाहिर तौर पर ऋषिकेश जैसे धार्मिक स्थान पर हिंदू मुस्लिम रंग लेना लाजमी है। स्थानीय लोगों ने दुकान पर ताला लगा दिया है, जबकि वे तो इसमें आग लगाना चाहते थे लेकिन पुलिस के हस्तक्षेप से ऐसा नहीं किया गया । इस घटना से शायद उन हिंदुओं की आंख खुले जो बिना सोचे समझे सस्ते की चाह में कहीं से भी कुछ भी खरीद लेते हैं।
