
शशि मिश्रा

बांग्लादेश में प्रताड़ित हिंदुओं की आवाज बुलंद करने वाले बिलासपुर के हिंदूवादी नेताओं को अब इस बात का एहसास हो गया है कि वे अपने ही देश में दोयम दर्जे के नागरिक बनकर रह गए हैं। प्रशासन की तुष्टिकरण की नीति के चलते एक और हिंदूवादी को अपनी जान देकर इस ओर ध्यान खींचना पड़ा है ।

मामला बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाला है। बांग्लादेश में लगातार हिंदू प्रताड़ित हो रहे हैं । एक के बाद एक तीन हिंदू युवकों की मॉब लिंचिंग कर जान ले ली गई। इसके विरोध में 28 दिसंबर को हिंदू संगठन की ओर से पुराना बस स्टैंड चौक पर बांग्लादेश हिंसा के विरोध में प्रदर्शन और पुतला दहन किया गया था। यहां इस्लामी आतंकवाद की निंदा की गई थी, जो बात शहर के भी कुछ कट्टर मुसलमानों को नागवार गुजरी। इसके बाद से लगातार संगठन से जुड़े नेताओं के खिलाफ बयान बाजी हो रही है, और कई हिंदूवादी नेता उनके निशाने पर है।
इसी आंदोलन में मूल रूप से मुंगेली के बामपारा का रहने वाला 19 वर्षीय नरेश साहू भी शामिल था, जो वर्तमान में चिंगराजपारा, गणेश चौक सरकंडा में रहकर प्राइवेट जॉब करता था। वह लगातार हिंदू संगठन के प्रदर्शन में शामिल हुआ करता था।

इस आंदोलन के बाद 31 दिसंबर की रात करीब 8:30 बजे वह अपनी बाइक से शनिचरी होते हुए घर लौट रहा था। इसी दौरान शनिचरी रपटा के पास खपड़गंज निवासी सोहेल खान अपने एक साथी के साथ बाइक से उसका पीछा करते हुए पहुंचा और उसके सामने बाइक अड़ा कर रास्ता रोक लिया। आरोप है कि सोहेल और उसके साथी ने पहले नरेश साहू के साथ गाली गलौच और मारपीट की, जिसमें उसके कपड़े भी फट गए। इसी दौरान उन लोगों ने चाकू निकालकर नरेश को जान से मारने की कोशिश भी की। सोहेल खान और उसके साथी ने धमकाया कि नरेश साहू, ठाकुर राम सिंह के साथ मिलकर हिंदू मुस्लिम करता है इसलिए दोनों को वह जान से मार देगा। सोहेल के हाथ में चाकू देखकर डर के मारे नरेश अपनी बाइक वहीं छोड़कर वहां से भाग गया।

इसके बाद हिंदू संगठनों के साथ मिलकर उसने पूरे मामले की शिकायत कोतवाली थाने में की, लेकिन पुलिस नरेश को पीड़ित मानने की बजाय उसे ही प्रताड़ित करने लगी। पहले ही दिन से जैसे सोहेल को क्लीन चिट दे दी गई। एक कथित वीडियो सामने लाया गया, जिसके आधार पर दावा किया गया कि घटना के समय सोहेल राजीव प्लाजा में था। इस वीडियो के आधार पर पुलिस नरेश पर बयान बदलने के लिए दबाव बनाने लगी, जिससे वह परेशान हो गया और अपने घर मुंगेली चला गया।
इधर कुछ कथित छद्म हिंदूवादी नेता नरेश के साथ खड़े होने की बजाय उस पर ही संदेह जताते हुए पोस्ट करने लगे, जिससे नरेश टूट गया और उसने शुक्रवार को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने से पहले उसने एक वीडियो बनाया, जिसमें उसने कहा कि उसे और ठाकुर राम सिंह को जान से मारने की धमकी दी गई है लेकिन पुलिस उसकी सच्चाई सुनने की बजाय आरोपियों को बचाने में लगी हुई है। पुलिस प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए नरेश ने अपने खुदकुशी के लिए सोहेल खान को जिम्मेदार ठहराया। इधर उसके ममेरे भाई भोला साहू द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो देखते ही उससे संपर्क किया गया तो नरेश की लाश फांसी के फंदे पर लटकती मिली।
इधर इसकी जानकारी होने पर बड़ी संख्या में हिंदूवादी नेता कोतवाली थाने पहुंच गए और पुलिस कार्यवाही का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया। यह सभी आरोपी सोहेल खान और उसके साथी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे । इधर दूसरी ओर पुलिस बल सोहेल खान के निवास के आसपास सुरक्षा देती नजर आई।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अपने ही देश में कथित हिंदूवादी पार्टी की ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद वे स्वयं को दोयम दर्जे के नागरिक महसूस कर रहे हैं । अब देश में हालात ऐसे हो गए हैं कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हिंसक घटनाओ का विरोध भी नहीं कर सकते। ऐसा करना यहां के कुछ कट्टर लोगों को रास नहीं आता और वे इतनी सी बात पर जान लेने पर उतारू हो जाते हैं। और दावा गंगा- जमुनी तहजीब और भाईचारे की की जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए। कहा गया कि केवल सरकार बदली है, सिस्टम अब भी भी उन्हीं के हाथ में है। नरेश साहू के साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के बावजूद जिस तरह से पुलिस ने सोहेल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कि उस वजह से नरेश को आत्महत्या करनी पड़ी।

इधर पुलिस का कहना है कि उन्होंने बयान के लिए नरेश को थाने बुलाया था। शायद उस पर बयान बदलने का दबाव था जिस कारण उसे खुदकुशी करनी पड़ी। पुलिस भले ही कह रही हो कि उन्होंने नरेश को प्रताड़ित नहीं किया था लेकिन मृत्यु पूर्व दिया गया बयान बड़ा प्रमाण है।
जानकारी मिली है कि दिनभर कोतवाली थाने के घेराव और प्रदर्शन के बाद पुलिस ने सोहेल खान को रायपुर से गिरफ्तार कर लिया है।
